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'रातों-रात बदल गए हालात': तस्मानिया के प्रॉपर्टी बाजार से निवेशकों ने खींचे हाथ, दो साल का उछाल थमा

ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 04:31 pm
'रातों-रात बदल गए हालात': तस्मानिया के प्रॉपर्टी बाजार से निवेशकों ने खींचे हाथ, दो साल का उछाल थमा

तस्मानिया में दो साल तक चली रियल एस्टेट की भारी तेजी अब थम गई है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों के लिए भी यह बाजार अब चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

ऑस्ट्रेलिया के द्वीप राज्य तस्मानिया में पिछले दो वर्षों से जारी रियल एस्टेट का 'गोल्ड रश' अब अचानक ठंडा पड़ता दिखाई दे रहा है। हालिया आंकड़ों और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों ने इस क्षेत्र से अपनी दिलचस्पी कम कर ली है, जिससे वहां के संपत्ति बाजार में एक बड़ी गिरावट की आशंका पैदा हो गई है। जानकारों का कहना है कि यह बदलाव इतनी तेजी से आया है कि इसे 'रातों-रात' हुई तब्दीली के रूप में देखा जा रहा है। विशेष रूप से होबार्ट और उसके आसपास के इलाकों में, जहां कभी घर खरीदने के लिए होड़ मची रहती थी, अब वहां खरीदारों की कमी देखी जा रही है। इसका सीधा असर उन भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों पर भी पड़ रहा है, जिन्होंने सिडनी और मेलबर्न जैसे महंगे शहरों के विकल्प के रूप में तस्मानिया को चुना था। तस्मानिया अपनी कम कीमतों और बेहतर रेंटल यील्ड (किराये से होने वाली आय) के कारण भारतीय समुदाय के बीच निवेश का एक पसंदीदा केंद्र बन गया था। बाजार में आए इस ठहराव के पीछे कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा ब्याज दरों में की गई लगातार बढ़ोतरी है। इसके कारण कर्ज लेना महंगा हो गया है और निवेशकों की भुगतान क्षमता पर असर पड़ा है। इसके अलावा, तस्मानिया सरकार द्वारा भूमि कर (land tax) और अन्य नियमों में किए गए बदलावों ने भी निवेशकों के उत्साह को कम किया है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जो पारंपरिक रूप से रियल एस्टेट को एक सुरक्षित निवेश मानते हैं, यह एक चेतावनी की तरह है। मेलबर्न स्थित निवेश सलाहकार मनप्रीत सिंह का कहना है कि 'पिछले दो सालों में कई भारतीय परिवारों ने तस्मानिया के क्षेत्रीय इलाकों में निवेश किया था, यह सोचकर कि वहां विकास की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन अब किराये में धीमी बढ़ोतरी और गिरती कीमतों ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।' विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि तस्मानिया का बाजार अब एक 'बायर्स मार्केट' (खरीदारों का बाजार) बन गया है, जहां खरीदारों के पास मोलभाव करने की अधिक शक्ति है। हालांकि, जो लोग दीर्घकालिक निवेश के नजरिए से देख रहे हैं, उनके लिए यह स्थिरता का दौर हो सकता है, लेकिन अल्पकालिक लाभ की तलाश करने वाले निवेशकों के लिए अब यहां राह आसान नहीं है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या तस्मानिया का बाजार फिर से गति पकड़ता है या यह गिरावट और गहरी होती है। फिलहाल, विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी नए निवेश से पहले बाजार की गहन रिसर्च और वित्तीय सलाहकारों से चर्चा अनिवार्य है।
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