राजनीति
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर चर्चा के लिए ईरान के विदेश मंत्री ओमान का दौरा करेंगे
ICN24 Newsroom 11 जुल॰ 2026, 09:31 am

ईरान के विदेश मंत्री हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा करने के लिए ओमान का दौरा करेंगे। इस जलमार्ग का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
ईरान के विदेश मंत्री जल्द ही ओमान की यात्रा करेंगे, जहां वह सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर उत्पन्न तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा पर द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच इस जलमार्ग को लेकर टकराव चरम पर है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने हाल के महीनों में इस जलमार्ग के माध्यम से होने वाले यातायात पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिसे अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे सैन्य और कूटनीतिक संघर्ष की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करती है। ओमान लंबे समय से ईरान और पश्चिमी देशों के बीच एक विश्वसनीय मध्यस्थ रहा है, और इस दौरे का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक रास्ता तलाशना माना जा रहा है।
फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू की गई सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में ईरान ने इस जलमार्ग को प्रभावी ढंग से बंद कर दिया था। तेहरान का तर्क है कि वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और सुरक्षा चिंताओं के कारण यह कदम उठाने को मजबूर हुआ है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से समुद्री व्यापार पर निर्भर देश, इस स्थिति को लेकर बेहद चिंतित हैं। ईरान की ओर से इस दौरे को शांति और स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में खाड़ी देशों के तेल पर निर्भर है, और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। इसके साथ ही, ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग भी वैश्विक तेल कीमतों में होने वाली वृद्धि से चिंतित हैं, क्योंकि इसका असर ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों और परिवहन लागत पर पड़ता है। समुद्री जहाजों पर काम करने वाले कई भारतीय नाविक भी इन क्षेत्रों में तैनात हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर उनके परिवारों में चिंता बनी रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान में होने वाली यह बैठक केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने की संभावनाओं को कम करने का एक प्रयास हो सकती है। यदि ईरान और पश्चिमी शक्तियों के बीच बातचीत सफल रहती है, तो इससे जलमार्ग के माध्यम से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल हो सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें मस्कट में होने वाली इन चर्चाओं पर टिकी हैं, जो भविष्य में मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक आर्थिक स्थिरता को परिभाषित करेंगी।
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