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ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य समझौते की तैयारी: नौवहन मार्गों पर बनी सहमति

ICN24 Newsroom 16 अग॰ 2026, 04:38 pm
ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य समझौते की तैयारी: नौवहन मार्गों पर बनी सहमति

ईरान और ओमान ने सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन मार्गों पर सहमति जताई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा में स्थिरता आने की उम्मीद है।

ईरान और ओमान ने सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही और नौवहन मार्गों को लेकर एक महत्वपूर्ण सहमति बनाई है। हालांकि दोनों देशों के बीच तकनीकी पहलुओं पर बातचीत अभी भी जारी है, लेकिन यह प्रगति इस क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हाल ही में पुष्टि की कि पिछले तीन हफ्तों में इस दिशा में सकारात्मक और सुचारू वार्ता हुई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन केंद्रों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल उत्पादन का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान और ओमान के बीच होने वाला यह समझौता अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लाइनों की सुरक्षा और सुगमता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि एक विस्तृत और व्यापक समझौता अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ है, लेकिन नौवहन मार्गों पर प्रारंभिक सहमति व्यापारिक जहाजों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों, विशेष रूप से कच्चे तेल के लिए खाड़ी देशों पर बहुत अधिक निर्भर है। हॉर्मुज में किसी भी प्रकार का तनाव सीधे तौर पर भारत में ईंधन की कीमतों और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करता है। वहीं, ऑस्ट्रेलिया के लिए, जो एक प्रमुख ऊर्जा निर्यातक है, वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव इसकी अर्थव्यवस्था और यहां रहने वाले प्रवासियों के जीवन स्तर (Cost of Living) पर गहरा प्रभाव डालता है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक व्यापारिक जहाजों पर काम करने वाले नाविकों में भारतीयों की एक बड़ी संख्या है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा सुनिश्चित होने से समुद्र में काम करने वाले हजारों भारतीय मूल के लोगों और उनके परिवारों को सुरक्षा का एहसास मिलेगा। क्षेत्रीय सहयोग बढ़ने से खाड़ी क्षेत्र में अनावश्यक सैन्य हस्तक्षेप की आशंकाएं भी कम हो सकती हैं, जिससे समुद्री व्यापार का माहौल सुरक्षित होगा। वर्तमान में दोनों देशों के तकनीकी दल समझौते की बारीकियों पर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफल रहता है, तो यह न केवल ईरान और ओमान के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि पश्चिम एशिया में समुद्री सुरक्षा के एक नए युग की शुरुआत भी कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बातचीत पर कड़ी नजर रखे हुए है, क्योंकि वैश्विक आर्थिक सुधार के लिए हॉर्मुज की सुरक्षा सर्वोपरि है। यह समझौता ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रही है। ओमान ने हमेशा से ईरान और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, और यह हालिया प्रगति उसी कूटनीतिक प्रयास का हिस्सा है। आने वाले हफ्तों में समझौते के अंतिम मसौदे पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जो वैश्विक बाजारों के लिए एक सकारात्मक संकेत होगा।
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