राजनीति
कर्नाटक कांग्रेस में असंतोष की लहर: रायचूर ग्रामीण विधायक का इस्तीफा, चिक्काबल्लापुर विधायक भी नाराज
ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 08:37 am

कर्नाटक में कैबिनेट विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर दरारें गहरी हो गई हैं। रायचूर ग्रामीण विधायक बसनागौड़ा दद्डल ने निगम अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है।
कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के भीतर हाल ही में हुए कैबिनेट विस्तार के बाद असंतोष की लहर तेज हो गई है। बुधवार को रायचूर ग्रामीण से विधायक बसनागौड़ा दद्डल ने कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया। दद्डल का यह कदम राज्य में सत्ताधारी दल के भीतर बढ़ रही आंतरिक कलह को उजागर करता है।
विधायक बसनागौड़ा दद्डल का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब वाल्मीकि निगम के भीतर कथित वित्तीय अनियमितताओं और बहु-करोड़ घोटाले को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इस्तीफे के पीछे का प्राथमिक कारण कैबिनेट विस्तार में उन्हें जगह न मिलना और सरकार की कार्यप्रणाली से उनकी नाराजगी है। दद्डल के अलावा, चिक्काबल्लापुर से विधायक प्रदीप ईश्वर ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त की है, जिससे पार्टी आलाकमान की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
प्रदीप ईश्वर, जो अपनी वाकपटुता के लिए जाने जाते हैं, ने हालिया घटनाक्रमों पर निराशा व्यक्त की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कई वरिष्ठ और उभरते हुए नेता कैबिनेट में जगह न मिलने या महत्वपूर्ण पोर्टफोलियो से वंचित रखे जाने के कारण उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। कर्नाटक में कांग्रेस की यह आंतरिक कलह विपक्षी दल भाजपा और जेडीएस को सरकार पर निशाना साधने का मौका दे रही है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से कर्नाटक मूल के प्रवासियों के लिए यह घटनाक्रम चिंता का विषय है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले कन्नड़ प्रवासी अपनी जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं और कर्नाटक की राजनीतिक स्थिरता को राज्य के विकास और निवेश के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। बेंगलुरू, जिसे भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है, में होने वाली किसी भी राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर वहां के बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर पड़ता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय निवेशकों के हितों पर प्रभाव पड़ सकता है।
कांग्रेस आलाकमान अब इन नाराज विधायकों को मनाने की कोशिश में जुट गया है। उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, जो राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं, के कंधों पर इस स्थिति को संभालने और सरकार की छवि को बचाने की बड़ी जिम्मेदारी है। यदि इन मतभेदों को जल्द नहीं सुलझाया गया, तो आने वाले दिनों में सरकार के सुचारू संचालन में बाधाएं आ सकती हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस असंतोष को शांत करने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं।
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