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भारतीय वायुसेना की बढ़ेगी ताकत: 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील पर बढ़ी हलचल, जानें क्यों है यह 'गेमचेंजर'

ICN24 Newsroom 10 जुल॰ 2026, 03:31 pm
भारतीय वायुसेना की बढ़ेगी ताकत: 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील पर बढ़ी हलचल, जानें क्यों है यह 'गेमचेंजर'

भारतीय वायुसेना 114 मल्टी-रोल लड़ाकू विमानों (MRFA) के अधिग्रहण की तैयारी कर रही है, जिसमें राफेल सबसे आगे है। यह सौदा भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी मारक क्षमता को वैश्विक स्तर पर आधुनिक बनाने के लिए एक ऐतिहासिक रक्षा सौदे की ओर कदम बढ़ा रही है। 'मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट' (MRFA) कार्यक्रम के तहत भारत 114 अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बना रहा है। इस मेगा-प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा न केवल भारत की हवाई सुरक्षा को अभेद्य बनाएगा, बल्कि दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भी पूरी तरह बदल देगा। इस दौड़ में फ्रांस का राफेल फाइटर जेट सबसे प्रमुख दावेदार बनकर उभरा है। भारत पहले ही 36 राफेल विमानों को अपनी सेवा में शामिल कर चुका है, जो वर्तमान में अंबाला और हाशिमारा बेस पर तैनात हैं। राफेल की 'स्पेक्ट्रा' (SPECTRA) जैसी उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली इसे किसी भी वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) के खिलाफ अत्यंत प्रभावी बनाती है। यह प्रणाली दुश्मन के राडार को भ्रमित करने और मिसाइलों को बेअसर करने में सक्षम है, जिससे यह विमान दुश्मन के इलाके में बिना पहचान में आए हमला कर सकता है। भारत के लिए यह सौदा केवल विमान खरीदने तक सीमित नहीं है। 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत, सरकार की शर्त है कि इन 114 विमानों में से अधिकांश का निर्माण भारत में ही किया जाए। इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर एक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर चर्चा कर रही है। इससे न केवल भारत में हजारों रोजगार पैदा होंगे, बल्कि लड़ाकू विमानों के निर्माण की तकनीक का हस्तांतरण (Transfer of Technology) भी सुनिश्चित होगा। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और रणनीतिक विशेषज्ञों के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया 'क्वॉड' (QUAD) के प्रमुख सदस्य हैं और दोनों देश एक स्वतंत्र और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वकालत करते हैं। भारतीय वायुसेना का आधुनिकीकरण ऑस्ट्रेलिया के साथ होने वाले द्विपक्षीय युद्धाभ्यासों, जैसे कि 'पिच ब्लैक' (Pitch Black), में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगा। एक सशक्त भारतीय वायुसेना हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी अनिवार्य है। चीन और पाकिस्तान के साथ दोहरी सीमाओं पर बढ़ते तनाव को देखते हुए, वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती है। वर्तमान में वायुसेना के पास स्वीकृत 42 स्क्वाड्रनों के मुकाबले काफी कम संख्या है। 114 नए लड़ाकू विमानों के आने से न केवल यह कमी पूरी होगी, बल्कि भारत को पांचवीं पीढ़ी के विमानों की ओर बढ़ने के लिए एक मजबूत आधार भी मिलेगा। आने वाले महीनों में इस सौदे की औपचारिक घोषणा होने की उम्मीद है, जो भारत की सामरिक संप्रभुता के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।
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