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डिफेंस सेक्टर के शेयरों में तूफानी तेजी: 125% के उछाल से निवेशक गदगद, क्या यह टिकाऊ है?
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:54 am

भारतीय रक्षा क्षेत्र के शेयरों ने हाल के महीनों में जबरदस्त प्रदर्शन किया है, जिसमें एक प्रमुख शेयर ने 125% तक का रिटर्न दिया है। विशेषज्ञ इसे सरकारी नीतियों का नतीजा मान रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार में रक्षा क्षेत्र (डिफेंस सेक्टर) की कंपनियों ने पिछले कुछ महीनों में असाधारण प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से एक प्रमुख रक्षा शेयर की कीमतों में 125% तक की वृद्धि देखी गई है, जिसने न केवल घरेलू निवेशकों बल्कि विदेशी भारतीय समुदाय (NRIs) को भी हैरान कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय निवेशकों के लिए, जो अक्सर भारतीय बाजार में 'वैल्यू निवेश' की तलाश में रहते हैं, यह तेजी एक महत्वपूर्ण संकेत है कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता अब धरातल पर परिणाम दिखा रही है।
इस जबरदस्त तेजी के पीछे कई प्रमुख कारक काम कर रहे हैं। सबसे पहला और महत्वपूर्ण कारण भारत सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल है। सरकार ने रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा घरेलू खरीद के लिए आरक्षित किया है, जिससे मझगांव डॉक (Mazagon Dock), गार्डन रीच शिपबिल्डर्स और भारत डायनेमिक्स जैसी कंपनियों के पास ऑर्डर बुक की कोई कमी नहीं है। इसके अलावा, भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का खरीदार नहीं रह गया है, बल्कि एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी उभर रहा है। दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका के देशों से मिल रहे ऑर्डर ने इन कंपनियों के रेवेन्यू गाइडेंस को काफी मजबूत कर दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस 125% के उछाल का एक बड़ा कारण 'शॉर्ट कवरिंग' और 'रिटेल यूफोरिया' भी हो सकता है। जब किसी सेक्टर में लगातार सकारात्मक खबरें आती हैं, तो निवेशक भविष्य के मुनाफे को वर्तमान कीमत में जोड़ना शुरू कर देते हैं। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया स्थित वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले प्रवासी भारतीयों को इस तेजी में सावधानी बरतनी चाहिए। तेजी जितनी तेज होती है, करेक्शन का जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है।
बाजार विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि कई डिफेंस शेयरों का प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) अनुपात ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इसका मतलब है कि स्टॉक अब महंगे हो गए हैं। यदि भविष्य में इन कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, तो मुनाफावसूली का दबाव बढ़ सकता है। इसके बावजूद, दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में रक्षा क्षेत्र को एक रणनीतिक निवेश माना जा रहा है क्योंकि भारत अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए अगले दशक में अरबों डॉलर खर्च करने वाला है।
ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय के लिए, जो म्यूचुअल फंड या पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम (PIS) के माध्यम से भारतीय इक्विटी में निवेश करते हैं, यह समय अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का है। रक्षा क्षेत्र में आई इस तेजी ने पोर्टफोलियो के संतुलन को बदल दिया होगा। कुल मिलाकर, डिफेंस स्टॉक्स की यह कहानी भारत की बढ़ती आर्थिक और सैन्य शक्ति का प्रतीक बन गई है, लेकिन निवेशकों को 'फोमो' (FOMO - छूट जाने का डर) में आकर बिना सोचे-समझे दांव लगाने से बचना चाहिए।
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