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गिफ्ट सिटी के जरिए डॉलर ऋण बढ़ाने की तैयारी में भारतीय बैंक; विदेशी निवेशकों और प्रवासियों के लिए नए अवसर
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:05 am

भारतीय बैंक अब गुजरात की गिफ्ट सिटी के माध्यम से डॉलर-आधारित ऋण और जमा योजनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे वैश्विक निवेश के नए रास्ते खुल रहे हैं।
भारत के प्रमुख बैंकिंग संस्थान अब गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) को एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय बैंक अपने कॉर्पोरेट ग्राहकों और बड़े निवेशकों को घरेलू शाखाओं के बजाय गिफ्ट सिटी में स्थित अपनी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) इकाइयों के माध्यम से डॉलर-आधारित ऋण (Dollar Lending) लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारत के इस पहले आईएफएससी को सिंगापुर, दुबई और लंदन जैसे स्थापित वित्तीय केंद्रों के बराबर खड़ा करना है।
बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े ऋणदाता अपने विदेशी मुद्रा पोर्टफोलियो को गिफ्ट सिटी में स्थानांतरित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह रणनीति न केवल बैंकों को बेहतर कर लाभ प्रदान करती है, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी भी बनाती है। वर्तमान में, भारतीय कंपनियां अक्सर विदेशी ऋण के लिए सिंगापुर या हांगकांग का रुख करती हैं, लेकिन अब सरकार और बैंक चाहते हैं कि यह व्यापार भारत के भीतर ही रहे।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और वहां के व्यापारियों के लिए यह विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों के बीच, गिफ्ट सिटी एक ऐसे सेतु के रूप में उभर रहा है जहाँ डॉलर में लेनदेन सुगम हो जाता है। ऑस्ट्रेलियाई प्रवासी भारतीय (NRIs) और वहां की कंपनियां जो भारत में निवेश करना चाहती हैं, वे अब इन आईएफएससी इकाइयों के माध्यम से विदेशी मुद्रा में फंड जुटा सकती हैं और निवेश कर सकती हैं। इससे उन्हें मुद्रा विनिमय (Currency Conversion) के जोखिमों से बचने में मदद मिलती है।
नियामक दृष्टिकोण से देखें तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गिफ्ट सिटी में डॉलर जमा और ऋण देने के नियमों में काफी ढील दी है। इससे बैंकों के लिए वहां तरलता (Liquidity) बनाए रखना आसान हो गया है। बैंकों का तर्क है कि यदि ऋण वितरण और जमा स्वीकार करने की प्रक्रिया गिफ्ट सिटी से होती है, तो परिचालन लागत कम हो जाती है और ग्राहकों को बेहतर ब्याज दरें दी जा सकती हैं। इसके अलावा, यहाँ दी जाने वाली 10 साल की टैक्स हॉलिडे (Tax Holiday) वैश्विक निवेशकों के लिए एक बड़ा आकर्षण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में गिफ्ट सिटी न केवल दक्षिण एशिया बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक वित्तीय केंद्र बन जाएगा। ऑस्ट्रेलिया-भारत मुक्त व्यापार समझौते (ECTA) के बाद, कई ऑस्ट्रेलियाई फर्म भारत में विस्तार की योजना बना रही हैं। उनके लिए गिफ्ट सिटी की बैंकिंग इकाइयां कार्यशील पूंजी और दीर्घकालिक ऋण के लिए सबसे उपयुक्त माध्यम साबित हो सकती हैं। यह न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी को भी बढ़ाएगा।
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