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भारतीय सेना में 'बस्तर रेजिमेंट' की सुगबुगाहट: रक्षा मंत्रालय ने शुरू किया प्रस्ताव का परीक्षण
ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 08:35 pm

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए भारतीय सेना में एक समर्पित 'बस्तर रेजिमेंट' के गठन के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है।
भारत की आंतरिक सुरक्षा और सैन्य ढांचे के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के भीतर एक अलग 'बस्तर रेजिमेंट' के गठन के प्रस्ताव पर विचार करना शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखित जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि मंत्रालय इस विषय का बारीकी से परीक्षण कर रहा है। यह कदम न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक एकीकरण की दिशा में भी एक बड़ा फैसला हो सकता है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि बस्तर के जनजातीय युवाओं में अदम्य साहस और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों की गहरी समझ होती है। यदि उन्हें सेना में एक समर्पित रेजिमेंट के माध्यम से अवसर दिया जाए, तो यह क्षेत्र में राष्ट्रवाद की भावना को और मजबूत करेगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि इस मांग के विभिन्न पहलुओं, जिसमें संगठनात्मक संरचना और आवश्यकताएं शामिल हैं, पर विभागीय स्तर पर चर्चा की जा रही है।
ऐतिहासिक रूप से, भारतीय सेना में सिख, गोरखा, डोगरा और राजपुताना राइफल्स जैसी क्षेत्रीय और जाति-आधारित रेजिमेंट रही हैं। हालांकि, स्वतंत्रता के बाद सेना ने नई रेजिमेंटों के गठन में क्षेत्रीय नामों के बजाय मिश्रित भर्ती नीति पर अधिक जोर दिया है। 'बस्तर रेजिमेंट' की मांग इस बहस को पुनर्जीवित करती है कि क्या विशिष्ट भौगोलिक चुनौतियों वाले क्षेत्रों के लिए स्थानीय स्तर पर केंद्रित भर्ती का लाभ मिल सकता है। बस्तर के युवा जंगलों की चुनौतियों से भली-भांति परिचित होते हैं, जो गुरिल्ला युद्ध और कठिन परिस्थितियों में सेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ा सकते हैं।
आस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ और मध्य भारत से ताल्लुक रखने वाले लोग, इस खबर को भारत के ग्रामीण विकास और सुरक्षा नीति में एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं। सिडनी और मेलबर्न में सक्रिय भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई संगठनों का मानना है कि इस तरह की पहल से बस्तर की छवि 'नक्सल प्रभावित' से बदलकर 'वीर सैनिकों की भूमि' के रूप में उभरेगी। यह कदम स्थानीय युवाओं को उग्रवाद के रास्ते से हटाकर मुख्यधारा में लाने और उन्हें रोजगार के सम्मानजनक अवसर प्रदान करने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
वर्तमान में, प्रस्ताव सैन्य विशेषज्ञों और रणनीतिकारों की मेज पर है। इसके गठन के लिए कई तकनीकी और नीतिगत बाधाओं को पार करना होगा, लेकिन रक्षा मंत्रालय की सक्रियता ने छत्तीसगढ़ में एक नई उम्मीद पैदा कर दी है। यदि यह रेजिमेंट वास्तविकता बनती है, तो यह देश की सुरक्षा में जनजातीय समाज के योगदान को एक आधिकारिक पहचान दिलाएगी और बस्तर के विकास के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगी।
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