राजनीति
भारत में जनगणना का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू; जाति और माता-पिता के जन्म की जानकारी होगी दर्ज
ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 10:37 am
भारत सरकार ने राष्ट्रीय जनगणना के दूसरे चरण की तारीखों की घोषणा कर दी है। 17 अगस्त से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया में पहली बार जातिगत विवरण और माता-पिता के जन्म स्थान की जानकारी भी जुटाई जाएगी।
भारत सरकार ने देश की बहुप्रतीक्षित जनगणना प्रक्रिया को गति देते हुए इसके दूसरे चरण की समयसीमा निर्धारित कर दी है। आधिकारिक सूचना के अनुसार, जनगणना का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू होगा। इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है क्योंकि इसमें न केवल डिजिटल माध्यमों का व्यापक उपयोग किया जाएगा, बल्कि नागरिकों से उनकी जाति और उनके माता-पिता के जन्म के स्थान से संबंधित विवरण भी मांगे जाएंगे। यह कदम भारत के जनसांख्यिकीय ढांचे को समझने और भविष्य की कल्याणकारी योजनाओं को आकार देने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे बर्फबारी वाले और दुर्गम क्षेत्रों के लिए विशेष कार्यक्रम तैयार किया गया है। इन क्षेत्रों में जनगणना की प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू होगी, ताकि सर्दियों का मौसम शुरू होने से पहले डेटा संग्रह का कार्य पूरा किया जा सके। सरकार ने इस बार 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) के विकल्प को भी बढ़ावा दिया है, जिसके तहत नागरिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना विवरण स्वयं दर्ज कर सकेंगे। यह पहल डिजिटल इंडिया के विजन के अनुरूप है और इससे डेटा संग्रह में सटीकता और गति आने की उम्मीद है।
इस जनगणना की सबसे चर्चित विशेषता 'जाति' और 'माता-पिता के जन्म विवरण' का समावेशन है। लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों द्वारा जातिगत जनगणना की मांग की जा रही थी। हालांकि यह पूर्ण जाति जनगणना नहीं है, लेकिन इसमें कुछ विशिष्ट श्रेणियों और सामाजिक-आर्थिक संकेतकों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, माता-पिता के जन्म स्थान और उनके मूल निवास के बारे में जानकारी मांगने से भारत के भीतर होने वाले आंतरिक प्रवास (Migration) के पैटर्न को समझने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डेटा नीति निर्माताओं को क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने और लक्षित विकास करने में सक्षम बनाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। भारत में होने वाले इन बदलावों का सीधा असर उन प्रवासियों पर पड़ता है जिनके परिवार अभी भी भारत में हैं या जो वहां संपत्ति और निवेश रखते हैं। सटीक जनगणना डेटा से उन क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे और सरकारी सेवाओं में सुधार होता है, जिससे प्रवासी भारतीयों के परिजनों का जीवन स्तर प्रभावित होता है। इसके अतिरिक्त, जिस तरह ऑस्ट्रेलिया में प्रत्येक पांच वर्ष में जनगणना (जैसे 2021 की जनगणना) आयोजित की जाती है और वहां भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती संख्या दर्ज की गई है, उसी प्रकार भारत का यह डेटा भी वैश्विक स्तर पर भारतीय आबादी के बदलते स्वरूप को स्पष्ट करेगा।
जनगणना की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए गृह मंत्रालय और भारत के महापंजीयक (RGI) के कार्यालय ने कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए हैं। नागरिकों को आश्वस्त किया गया है कि उनका डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और राष्ट्रीय योजना निर्माण के लिए किया जाएगा। आगामी महीनों में, प्रगणक (Enumerators) घर-घर जाकर डेटा का सत्यापन करेंगे, जो भारत के भविष्य के आर्थिक और सामाजिक मानचित्र को तैयार करने की दिशा में अंतिम कदम होगा।
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