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तेहरान में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता को भारत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि: विदेश राज्य मंत्री और बिहार के राज्यपाल ने किया प्रतिनिधित्व
ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 08:31 am

भारत के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने तेहरान पहुंचकर ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की और दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक संबंधों को रेखांकित किया।
तेहरान: भारत ने ईरान के साथ अपने गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को एक बार फिर प्रदर्शित करते हुए वहां के दिवंगत सर्वोच्च नेता को आधिकारिक रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर भारत सरकार का प्रतिनिधित्व विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने किया। दोनों नेताओं ने तेहरान में आयोजित शोक सभा और अंतिम संस्कार की रस्मों में शिरकत की, जो दोनों देशों के बीच निरंतर प्रगाढ़ होते कूटनीतिक रिश्तों का प्रतीक है।
विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस यात्रा की जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारत इस दुख की घड़ी में ईरान के साथ खड़ा है। उन्होंने उल्लेख किया कि लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन के साथ उनकी यह यात्रा भारत की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसमें वह अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ स्थिरता और शांति बनाए रखने की दिशा में काम करता है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी अधिकारियों से मुलाकात कर भारत की ओर से गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
ईरान और भारत के संबंध केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह साझा इतिहास और संस्कृति पर आधारित हैं। सामरिक दृष्टिकोण से भी ईरान भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाएं और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) दोनों देशों के आर्थिक हितों को जोड़ते हैं। ऐसे में ईरान के शीर्ष नेतृत्व के प्रति सम्मान प्रकट करना भारत की 'पड़ोस प्रथम' और 'विस्तारित पड़ोस' नीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी मध्य-पूर्व की यह हलचल विशेष महत्व रखती है। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सीधे तौर पर भारतीय प्रवासियों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई इस घटनाक्रम को भारत की बढ़ती भू-राजनीतिक सक्रियता के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम न केवल ईरान के साथ संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि पश्चिम एशिया में संतुलन बनाए रखने में भी मदद करेगा।
इस शोक सभा के दौरान, भारतीय प्रतिनिधियों ने ईरानी नेतृत्व के साथ संक्षिप्त चर्चा भी की, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। भारत का यह कदम इस बात की पुष्टि करता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर वह अपने मित्रों के साथ हर स्थिति में मजबूती से खड़ा रहता है। आगामी समय में इन संबंधों के और अधिक रणनीतिक आयाम लेने की उम्मीद है, जिससे व्यापार और सुरक्षा के क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा होंगी।
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