राजनीति
विपक्षी गठबंधन 'INDIA' ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 12:31 am
विपक्षी गठबंधन 'INDIA' ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई है और चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप की मांग की है।
भारत के प्रमुख विपक्षी दलों के गठबंधन 'INDIA' ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। गठबंधन के नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक संयुक्त पत्र भेजकर भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की भूमिका और उसकी तटस्थता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह कदम पिछले महीने 8 जून को नई दिल्ली में आयोजित गठबंधन की सातवीं महत्वपूर्ण बैठक के बाद उठाया गया है, जिसमें चुनावी पारदर्शिता को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी।
मुख्य न्यायाधीश को लिखे इस पत्र में विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग द्वारा अपनाए जा रहे हालिया तौर-तरीकों पर आपत्ति जताई है। गठबंधन का तर्क है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनाव आयोग जैसी संस्था का पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष होना अनिवार्य है। पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाली शिकायतों के निपटारे में आयोग की गति और दृष्टिकोण में कथित रूप से असंतुलन देखा गया है। इसी पृष्ठभूमि में, गठबंधन ने न्यायपालिका से इस मामले में हस्तक्षेप करने और चुनावी शुचिता बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। प्रवासी भारतीय (NRIs) न केवल भारत की राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं, बल्कि वे वैश्विक स्तर पर भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े पैरोकार भी हैं। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रह रहे भारतीय नागरिक अक्सर भारत में लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थागत स्वतंत्रता को लेकर चर्चा करते हैं। चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाले सवाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और प्रवासी भारतीयों के भरोसे को प्रभावित करते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय संगठन अक्सर भारत में सुशासन और पारदर्शी मतदान की वकालत करते रहे हैं।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग ने कई मौकों पर सत्तारूढ़ दल के प्रति उदार रुख अपनाया है, जबकि विपक्षी दलों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई नहीं की गई। पत्र में चुनाव के दौरान 'लेवल प्लेइंग फील्ड' (सभी के लिए समान अवसर) सुनिश्चित करने की मांग की गई है। गठबंधन का मानना है कि यदि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कम होता है, तो यह लोकतांत्रिक ढांचे के लिए एक गंभीर संकट होगा।
इस घटनाक्रम ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां सत्ता पक्ष इन आरोपों को आधारहीन और हार की हताशा बता रहा है, वहीं विपक्षी दल इसे संविधान और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई करार दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस पत्र का संज्ञान किस प्रकार लेता है और क्या चुनाव आयोग अपनी कार्यप्रणाली में किसी प्रकार के बदलाव के संकेत देता है। फिलहाल, इस पत्र ने भारत की चुनावी राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, जिसका असर दूरगामी हो सकता है।
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