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टीएमसी में फूट: निर्वाचन आयोग ने दोनों गुटों से मांगा जवाब, उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्न जब्त होने का खतरा

ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 11:31 pm
टीएमसी में फूट: निर्वाचन आयोग ने दोनों गुटों से मांगा जवाब, उपचुनाव से पहले चुनाव चिह्न जब्त होने का खतरा

निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को 26 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिससे पार्टी के चुनाव चिह्न 'जोड़ा फूल' पर संकट मंडरा रहा है।

भारत के निर्वाचन आयोग (ECI) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ते आंतरिक कलह और पार्टी विभाजन की स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आधिकारिक नोटिस जारी कर 26 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक अपनी स्थिति स्पष्ट करने और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि आगामी उपचुनावों से पहले पार्टी के नाम और उसके प्रसिद्ध चुनाव चिह्न 'जोड़ा फूल' के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। निर्वाचन आयोग की यह कार्रवाई चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत की गई है। इस नियम के अनुसार, जब किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के भीतर दो या दो से अधिक प्रतिद्वंद्वी गुट होने का दावा किया जाता है, तो आयोग को यह तय करने का अधिकार होता है कि वास्तविक पार्टी कौन सी है। यदि दोनों पक्षों के दावे अपूर्ण रहते हैं या विवाद लंबा खिंचता है, तो आयोग निष्पक्षता बनाए रखने के लिए चुनाव चिह्न को अस्थायी रूप से 'फ्रीज' यानी जब्त कर सकता है। ऐसी स्थिति में, दोनों गुटों को उपचुनावों के लिए नए नाम और अलग चुनाव चिह्न आवंटित किए जा सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति हाल ही में महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में हुई टूट जैसी ही है। टीएमसी के मामले में, प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच संगठनात्मक ढांचे और निर्वाचित प्रतिनिधियों (सांसदों और विधायकों) के समर्थन को लेकर खींचतान जारी है। निर्वाचन आयोग ने दोनों पक्षों को अपने समर्थन के प्रमाण के रूप में हलफनामा और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासी, विशेष रूप से सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन में रहने वाला बंगाली समुदाय, इस राजनीतिक उठापटक पर गहरी नजर रख रहा है। ऑस्ट्रेलिया में पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले भारतीयों की एक बड़ी आबादी है जो अपनी जड़ों और राज्य की राजनीतिक स्थिरता को लेकर संवेदनशील रहते हैं। सामुदायिक मंचों पर इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि पार्टी के भीतर इस तरह की फूट विकास कार्यों और प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित कर सकती है। यदि 26 जुलाई की समय सीमा तक संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो निर्वाचन आयोग एक अंतरिम आदेश पारित कर सकता है। उपचुनावों की घोषणा कभी भी हो सकती है, ऐसे में चुनाव चिह्न का जब्त होना दोनों गुटों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा। नए चिह्न के साथ मतदाताओं तक पहुंचना और अपनी पहचान स्थापित करना किसी भी गुट के लिए आसान नहीं होगा। फिलहाल, सबकी निगाहें 26 जुलाई की शाम पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि टीएमसी की कमान और पहचान किस दिशा में जाएगी।
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