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अवैध विदेशी नागरिकों से कानून के मुताबिक निपटा जाएगा: विदेश मंत्रालय
ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 01:00 am

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश सहित सभी अवैध विदेशी नागरिकों को तय कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्वासित किया जाएगा।
नई दिल्ली: भारत सरकार ने अवैध आव्रजन (इमिग्रेशन) पर अपना कड़ा रुख दोहराते हुए शुक्रवार को कहा कि देश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों सहित सभी विदेशी नागरिकों के खिलाफ स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही ढाका द्वारा राष्ट्रीयता का सत्यापन (नेशनलिटी वेरिफिकेशन) पूरा कर लिया जाएगा, इन अवैध प्रवासियों के निर्वासन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत में मौजूद सभी विदेशी नागरिक, यदि वे यहां अवैध रूप से रह रहे हैं, तो उनसे निपटने के लिए हमारे पास कानून हैं और उनके अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी। जहां तक इन लोगों के निर्वासन का सवाल है, इसके लिए एक द्विपक्षीय तंत्र मौजूद है। हम इन मामलों को बांग्लादेशी पक्ष के पास उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए भेजते हैं और एक बार सत्यापन होने के बाद, हम निर्वासन की प्रक्रिया शुरू करते हैं।"
प्रवक्ता ने जानकारी दी कि वर्तमान में सत्यापन के कई अनुरोध बांग्लादेशी पक्ष के पास लंबित हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाएगा ताकि भारत में अवैध रूप से रह रहे लोगों को सुचारू और कुशल तरीके से उनके देश वापस भेजा जा सके। पिछले सप्ताह विदेश मंत्रालय ने बताया था कि भारत ने 2,680 से अधिक अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की सूची सत्यापन के लिए सौंपी है और भारत को इस पर त्वरित प्रतिक्रिया की उम्मीद है।
जायसवाल ने आगे कहा, "कई मामलों में यह सत्यापन पिछले पांच साल या उससे अधिक समय से लंबित है। हमारी अपेक्षा है कि हमें इस मुद्दे पर बांग्लादेश से जल्द जवाब मिले ताकि दोनों देशों के बीच मौजूदा द्विपक्षीय समझौते के आधार पर इन लोगों को वापस भेजा जा सके।"
यह घटनाक्रम प्रवासी भारतीयों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी प्रासंगिक है। दुनिया भर में अवैध आव्रजन एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। जहां ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय एक व्यवस्थित और वैध आव्रजन प्रक्रिया का समर्थन करता है, वहीं भारत सरकार का यह रुख दर्शाता है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा और कानूनी ढांचे को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यह स्पष्ट संदेश है कि सीमा सुरक्षा और वैध दस्तावेज़ीकरण अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सर्वोपरि हैं।
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