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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू: जींद-सोनीपत रूट पर दौड़ेगी 'ग्रीन' ट्रेन, जानें किराया और समय सारिणी

ICN24 Newsroom 18 जुल॰ 2026, 01:34 am
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू: जींद-सोनीपत रूट पर दौड़ेगी 'ग्रीन' ट्रेन, जानें किराया और समय सारिणी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। किफायती किराए और शून्य उत्सर्जन वाली इस ट्रेन के बारे में पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल खंड पर शुरू हुई यह ट्रेन न केवल भारत की तकनीकी प्रगति का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है। इस परियोजना के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है जो परिवहन के लिए हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका किफायती किराया और पर्यावरण के अनुकूल होना है। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस ट्रेन का किराया आम जनता की जेब को ध्यान में रखकर तय किया गया है, जिससे यह मध्यम वर्ग और दैनिक यात्रियों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभरेगी। जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली यह ट्रेन स्थानीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ-साथ प्रदूषण के स्तर को कम करने में भी मदद करेगी। क्योंकि यह ट्रेन ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग करती है, इसलिए इसके इंजन से धुएं की जगह केवल पानी की वाष्प (Water Vapor) निकलती है। समय सारिणी की बात करें तो यह ट्रेन नियमित अंतराल पर जींद और सोनीपत के बीच अपनी सेवाएं प्रदान करेगी। रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती चरण में इसके स्टॉपेज प्रमुख स्टेशनों पर रखे गए हैं ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को इस आधुनिक सेवा का लाभ मिल सके। यह ट्रेन 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' पहल का हिस्सा है, जिसके तहत भारतीय रेलवे ने आने वाले वर्षों में विभिन्न विरासत और पहाड़ी रूटों पर ऐसी 35 ट्रेनें चलाने की योजना बनाई है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही देश वर्तमान में 'ग्रीन हाइड्रोजन' के क्षेत्र में व्यापक सहयोग कर रहे हैं। जिस तरह ऑस्ट्रेलिया अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए हाइड्रोजन पर निवेश बढ़ा रहा है, भारत की यह उपलब्धि दोनों देशों के बीच तकनीकी आदान-प्रदान और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी भारतीय इस विकास को भारत के आधुनिकीकरण के एक बड़े संकेत के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन न केवल कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगा, बल्कि डीजल पर निर्भरता घटाकर भारतीय रेलवे के परिचालन खर्च में भी लंबी अवधि में कमी लाएगा। जींद-सोनीपत रूट पर इसकी सफलता के बाद, इसे देश के अन्य हिस्सों में भी विस्तारित करने की तैयारी है। भारत का लक्ष्य 2030 तक शुद्ध शून्य (Net Zero) उत्सर्जन प्राप्त करना है, और इस दिशा में यह ट्रेन एक मील का पत्थर साबित होगी।
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