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हल्द्वानी 'शुद्धीकरण' विवाद: भाजपा ने पल्ला झाड़ा, निष्पक्ष जांच की मांग; राज्यसभा में गूंजा मुद्दा

ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 11:40 pm
हल्द्वानी 'शुद्धीकरण' विवाद: भाजपा ने पल्ला झाड़ा, निष्पक्ष जांच की मांग; राज्यसभा में गूंजा मुद्दा

हल्द्वानी में कथित 'शुद्धीकरण' अनुष्ठान को लेकर राज्यसभा में हंगामा हुआ। भाजपा ने कार्यक्रम से किसी भी तरह के संबंध से इनकार करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

उत्तराखंड के हल्द्वानी में हाल ही में आयोजित एक कथित 'शुद्धीकरण' अनुष्ठान ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। संसद के ऊपरी सदन, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आधिकारिक तौर पर इस घटना से पल्ला झाड़ लिया है। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि पार्टी का इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है और सरकार से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है। राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि इस तरह के आयोजनों से समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने हल्द्वानी की घटना का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर विशेष समुदायों को लक्षित कर किए जाने वाले ऐसे अनुष्ठान संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं। खड़गे ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा कि इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए सत्ता पक्ष के नेताओं ने सदन में कहा कि भाजपा किसी भी ऐसी गतिविधि का समर्थन नहीं करती जो सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ती हो। भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ताओं ने बाद में मीडिया से बात करते हुए कहा कि हल्द्वानी में हुआ कार्यक्रम कुछ व्यक्तिगत संगठनों का निजी फैसला हो सकता है, लेकिन इसमें भाजपा की कोई आधिकारिक भूमिका नहीं थी। पार्टी ने उत्तराखंड सरकार से अपील की है कि वे इस घटना के पीछे के तथ्यों की जांच करें ताकि सच्चाई सामने आ सके। हल्द्वानी पिछले कुछ समय से विभिन्न कारणों से चर्चा में रहा है, जिसमें अतिक्रमण हटाने के अभियान से लेकर सांप्रदायिक तनाव की छिटपुट घटनाएं शामिल हैं। विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में आगामी स्थानीय चुनावों और राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस मुद्दे को तूल दिया जा रहा है। इस घटना का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं है; ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय (डिआस्पोरा) के बीच भी भारत की सामाजिक स्थिरता को लेकर चिंताएं और चर्चाएं देखी जा रही हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय भारत में होने वाली ऐसी राजनीतिक हलचलों पर बारीकी से नजर रखता है क्योंकि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान और वैश्विक धारणा को प्रभावित करता है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले कई भारतीयों ने सोशल मीडिया के माध्यम से शांति और कानून के शासन को बनाए रखने की अपील की है। भाजपा के इस स्पष्टीकरण को नुकसान नियंत्रण (डैमेज कंट्रोल) की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है ताकि विकास के एजेंडे से ध्यान न भटके। फिलहाल, उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन इस मामले की तहकीकात कर रहे हैं कि क्या इस आयोजन के लिए आवश्यक अनुमतियां ली गई थीं।
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