राजनीति
गिलगित-बाल्टिस्तान हमेशा भारत का रहेगा: पाकिस्तान के 'प्रांतीय' दांव पर विदेश मंत्रालय की दो टूक
ICN24 Newsroom 18 जुल॰ 2026, 03:34 am

भारत ने गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवां प्रांत बनाने की पाकिस्तान की कोशिशों को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे भारत का अभिन्न अंग बताया है।
भारत सरकार ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के अंतर्गत आने वाले गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र को अपना पांचवां औपचारिक प्रांत घोषित करने की इस्लामाबाद की कोशिशों पर कड़ा ऐतराज जताया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक कड़े संदेश में स्पष्ट किया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान हमेशा से भारत का अटूट हिस्सा था, है और रहेगा। भारत ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान के किसी भी अवैध कदम से जमीनी हकीकत नहीं बदली जा सकती।
यह विवाद तब और गहरा गया जब गिलगित-बाल्टिस्तान विधानसभा ने हाल ही में पाकिस्तान के संविधान में संशोधन कर इसे पूर्ण प्रांतीय दर्जा देने और पाकिस्तान की संसद में प्रतिनिधित्व देने की मांग का एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया। भारत ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से अवैध और आधारहीन करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार के दिखावटी कृत्य न तो पाकिस्तान द्वारा किए गए अवैध कब्जे को छिपा सकते हैं और न ही पिछले सात दशकों से इस क्षेत्र में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन से दुनिया का ध्यान भटका सकते हैं।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को दोहराते हुए भारत ने कहा कि 1947 के विलय पत्र (Instrument of Accession) के अनुसार संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, जिसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है, कानूनी और संवैधानिक रूप से भारत का हिस्सा है। पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है और वहां के जनसांख्यिकीय स्वरूप को बदलने की कोशिश कर रहा है। नई दिल्ली का मानना है कि पाकिस्तान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की एक हताश कोशिश है, जो सफल नहीं होगी।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह मुद्दा काफी संवेदनशील है। ऑस्ट्रेलिया-भारत रणनीतिक संबंधों के इस दौर में, भारतीय प्रवासियों का एक बड़ा हिस्सा क्षेत्रीय स्थिरता और भारत की क्षेत्रीय अखंडता का पुरजोर समर्थन करता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे प्रमुख शहरों में सक्रिय भारतीय संगठन अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के पक्ष को मजबूती से रखते आए हैं। कैनबरा में भी नीति निर्धारकों के बीच दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को लेकर चर्चाओं में यह मुद्दा प्रमुखता से उठता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा उठाया गया यह कदम संभवतः चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को सुरक्षा देने की कवायद का हिस्सा भी हो सकता है, क्योंकि यह विवादास्पद प्रोजेक्ट इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। हालांकि, भारत ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे पाकिस्तान को उसके अवैध कब्जे को समाप्त करने और भारतीय क्षेत्रों को खाली करने के लिए कहें।
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