राजनीति
ईरान के ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर अमेरिका की पैनी नजर: क्या परमाणु ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की तैयारी है?
ICN24 Newsroom 18 जुल॰ 2026, 04:34 am

ईरान के परमाणु कार्यक्रम के केंद्र ‘पिकैक्स माउंटेन’ पर अमेरिकी हमले की संभावित योजना ने वैश्विक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम मध्य-पूर्व की स्थिरता को बदल सकता है।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ता तनाव एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में पेंटागन ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर संभावित सैन्य कार्रवाई की रूपरेखा तैयार कर रहा है। इस चर्चा के केंद्र में ईरान का ‘पिकैक्स माउंटेन’ (Kuh-e Kolang) है। यह स्थान केवल एक भौगोलिक विशेषता नहीं है, बल्कि ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण और अभेद्य हिस्सा माना जाता है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, इस पहाड़ के नीचे ईरान ने अपनी सबसे उन्नत परमाणु संवर्धन सुविधाएं और मिसाइल भंडारण केंद्र स्थापित किए हैं।
पिकैक्स माउंटेन का रणनीतिक महत्व इसकी प्राकृतिक बनावट में निहित है। यह क्षेत्र न केवल हवाई हमलों से सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि यह ईरान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को भी मजबूती देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका या इजरायल इस क्षेत्र को निशाना बनाते हैं, तो इसका उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता को वर्षों पीछे धकेलना होगा। इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता रहा है और वह इस दिशा में किसी भी अमेरिकी पहल का पुरजोर समर्थन करता दिख रहा है।
इस सैन्य रणनीति के निहितार्थ केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष चिंता का विषय है। वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह का व्यवधान सीधे तौर पर ऑस्ट्रेलिया और भारत में ईंधन की कीमतों को प्रभावित कर सकता है। ऑस्ट्रेलिया के लिए, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और मुक्त व्यापार का पक्षधर है, मध्य-पूर्व में अस्थिरता का अर्थ है वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव। साथ ही, खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा भी एक बड़ा मानवीय पहलू है, जो सीधे तौर पर भारत की विदेशी नीति और प्रेषण (remittance) को प्रभावित करता है।
सैन्य विश्लेषकों का तर्क है कि पिकैक्स माउंटेन पर हमला करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है। पहाड़ की गहराई में स्थित इन ठिकानों को नष्ट करने के लिए 'बंकर-बस्टर' जैसे विशेष हथियारों की आवश्यकता होगी। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यह केवल दबाव बनाने की एक रणनीति हो सकती है ताकि ईरान को वार्ता की मेज पर वापस लाया जा सके। फिलहाल, दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस और तेहरान के बयानों पर टिकी हैं, क्योंकि एक भी गलत कदम इस क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की आग में झोंक सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में, कैनबरा में रक्षा नीति निर्माता स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच गहरे सैन्य संबंधों को देखते हुए, ऐसी किसी भी कार्रवाई में ऑस्ट्रेलिया की परोक्ष भूमिका या समर्थन की मांग की जा सकती है। भारतीय समुदाय के लिए, यह समय भू-राजनीतिक परिवर्तनों को समझने और उनके आर्थिक प्रभावों के प्रति सतर्क रहने का है। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि क्या यह केवल एक चेतावनी है या वास्तव में किसी बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत।
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