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हाथों में तिरंगा लिए डीएम कार्यालय पहुंचे स्कूली छात्र; हमीरपुर में खराब सड़कों के खिलाफ 'जनरेशन अल्फा' का मोर्चा

ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 07:37 pm
हाथों में तिरंगा लिए डीएम कार्यालय पहुंचे स्कूली छात्र; हमीरपुर में खराब सड़कों के खिलाफ 'जनरेशन अल्फा' का मोर्चा

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में स्कूली छात्रों ने खराब सड़कों के विरोध में जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय तक मार्च निकाला। तिरंगा थामे इन बच्चों ने प्रशासन को चेतावनी दी है।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से नागरिक सक्रियता की एक अनूठी तस्वीर सामने आई है, जहां 'जनरेशन अल्फा' यानी स्कूली बच्चों ने अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए मोर्चा खोल दिया है। हाथ में तिरंगा लिए और बुलंद नारों के साथ, इन नन्हे प्रदर्शनकारियों ने अपने अभिभावकों के साथ जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय की ओर कूच किया। यह विरोध प्रदर्शन इलाके की जर्जर सड़कों की स्थिति को लेकर था, जिसने लंबे समय से स्कूली बच्चों और स्थानीय निवासियों का जीवन दूभर कर रखा है। हमीरपुर के इस मामले ने न केवल स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी व्यापक ध्यान आकर्षित किया है। प्रदर्शन के दौरान बच्चों का जज्बा किसी मंझे हुए राजनेता से कम नहीं था। जैसे ही छात्रों का जत्था कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ा, पुलिस बल ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। हालांकि, पुलिस के लिए इन बच्चों को शांत करना आसान नहीं था, क्योंकि उनकी मांगें जायज थीं और उनका इरादा पक्का। बच्चों का कहना था कि खराब सड़कों के कारण उन्हें स्कूल जाने में अत्यधिक कठिनाई होती है और बरसात के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी को उजागर किया है। जनरेशन अल्फा, जो तकनीकी रूप से काफी जागरूक मानी जाती है, अब अपने अधिकारों के प्रति भी सचेत दिख रही है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे अपने माता-पिता के साथ दोबारा सड़कों पर उतरेंगे और इस बार आंदोलन और भी बड़ा होगा। प्रशासन ने फिलहाल उन्हें आश्वासन देकर घर वापस भेजा है, लेकिन स्थानीय लोगों में अविश्वास की भावना बनी हुई है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए, विशेषकर वे जो उत्तर प्रदेश या उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से ताल्लुक रखते हैं, ऐसी खबरें मिश्रित भावनाएं लेकर आती हैं। एक तरफ जहां अपनी जड़ों से जुड़े क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी चिंता का विषय है, वहीं दूसरी तरफ युवा पीढ़ी का इस तरह जागरूक होना एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी अक्सर अपने पैतृक गांवों के विकास के लिए चिंतित रहते हैं और इस तरह के जमीनी विरोध प्रदर्शन भारत में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा सकते हैं। फिलहाल, हमीरपुर प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। एक ओर जहां विकास की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सड़क के लिए बच्चों का सड़कों पर उतरना सिस्टम की विफलताओं को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन बच्चों की 'तिरंगा यात्रा' और उनके अल्टीमेटम को कितनी गंभीरता से लेता है।
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