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फंडिंग में देरी ने शहर के एआई ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क को संकट में डाला; सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 04:38 am
फंडिंग में देरी ने शहर के एआई ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क को संकट में डाला; सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

शहर के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क को बजट की कमी के कारण परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे सड़क सुरक्षा निगरानी प्रभावित हो सकती है।

शहर की आधुनिक परिवहन प्रणाली में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क पर अब अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। सरकारी फंडिंग में हो रही निरंतर देरी ने इस उच्च-तकनीकी बुनियादी ढांचे को परिचालन संबंधी गंभीर दबाव में डाल दिया है। यह नेटवर्क, जो विशेष रूप से मोबाइल फोन के अवैध उपयोग और सीटबेल्ट उल्लंघन की पहचान करने के लिए डिजाइन किया गया था, अब अपने रखरखाव और सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए संघर्ष कर रहा है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के लिए आवंटित बजट का एक बड़ा हिस्सा अभी तक विभाग को हस्तांतरित नहीं किया गया है। इसका सीधा असर कैमरों के तकनीकी रखरखाव पर पड़ रहा है। एआई तकनीक को सटीक परिणामों के लिए निरंतर डेटा फीड और एल्गोरिदम अपडेट की आवश्यकता होती है। फंडिंग की कमी के कारण, इन प्रणालियों के कैलिब्रेशन में देरी हो रही है, जिससे गलत चालान जारी होने या उल्लंघनकर्ताओं के छूट जाने का जोखिम बढ़ गया है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। समुदाय का एक बड़ा हिस्सा, विशेष रूप से सिडनी और मेलबर्न जैसे बड़े शहरों के बाहरी इलाकों में रहने वाले लोग, काम के लिए लंबी दूरी तय करते हैं। भारतीय मूल के कई पेशेवर डिलीवरी सेवाओं और परिवहन क्षेत्र से भी जुड़े हैं। सड़क सुरक्षा नियमों का सख्त पालन उनके जीवन का हिस्सा है, लेकिन तकनीक में खराबी के कारण होने वाली गलतियां या सुरक्षा में कमी उनके लिए चिंता का विषय है। यदि ये कैमरे प्रभावी ढंग से काम नहीं करते हैं, तो सड़कों पर लापरवाही बढ़ सकती है, जो अंततः सभी सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए खतरा है। परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि एआई कैमरों ने पिछले कुछ वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन कैमरों के डर से चालक अब गाड़ी चलाते समय फोन का उपयोग करने से कतराते हैं। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि यदि सरकार समय पर संसाधन उपलब्ध नहीं करा सकती, तो ऐसी महंगी प्रणालियों पर निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है, उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर बजटीय लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। वर्तमान में, इस नेटवर्क के विस्तार की योजनाएं भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। कई व्यस्त चौराहों पर नए कैमरे लगाए जाने थे, लेकिन अब ठेकेदारों को भुगतान न होने के कारण काम रुक गया है। विभाग के भीतर से आ रही रिपोर्टों के अनुसार, यदि अगले कुछ हफ्तों में फंड जारी नहीं किया गया, तो नेटवर्क के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। ICN24 की टीम ने इस मुद्दे पर स्थानीय भारतीय प्रवासियों से बात की, जिनका मानना है कि तकनीक का सही उपयोग ही सड़क सुरक्षा की कुंजी है। उनका कहना है कि सरकार को राजस्व वसूली (फाइन्स) के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निगरानी प्रणाली में कोई तकनीकी चूक न हो। आने वाले हफ्तों में बजट की स्थिति साफ होने की उम्मीद है, लेकिन तब तक सड़क सुरक्षा पर यह दबाव बना रहेगा।
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