राजनीति
40 साल की दोस्ती के बाद खुला राज: DNA टेस्ट ने बताया कि बचपन की सहेलियां ही थीं सगी बहनें
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 02:37 pm

बचपन में अलग हुई दो लड़कियों ने दशकों तक गहरी दोस्ती निभाई, लेकिन एक डीएनए टेस्ट ने उनकी जिंदगी बदल दी जब उन्हें पता चला कि वे असल में सगी बहनें हैं।
कहते हैं कि हकीकत कभी-कभी कल्पना से भी ज्यादा हैरान करने वाली होती है। एक ऐसी ही दिल को छू लेने वाली और अविश्वसनीय घटना सामने आई है, जहां दो महिलाएं जो पिछले कई दशकों से एक-दूसरे की सबसे अच्छी दोस्त थीं, वे असल में सगी बहनें निकलीं। इस सच्चाई का खुलासा 40 साल बाद तब हुआ जब उन्होंने एक व्यावसायिक डीएनए (DNA) टेस्ट कराने का फैसला किया।
यह कहानी उन दो महिलाओं की है जो बचपन में ही एक-दूसरे से अलग हो गई थीं। अलग-अलग परिवारों में परवरिश होने के बावजूद, किस्मत उन्हें एक ही मोड़ पर वापस ले आई। वे एक-दूसरे से मिलीं, उनकी पसंद-नापसंद मिलने लगी और धीरे-धीरे वे गहरी सहेलियां बन गईं। उन्हें कभी इस बात का अंदाजा नहीं था कि जिस व्यक्ति को वे अपनी सहेली मान रही हैं, उसके साथ उनका खून का रिश्ता है।
दशकों तक साथ रहने और सुख-दुख साझा करने के बाद, उन्होंने अपनी वंशावली और पूर्वजों के बारे में जानने की जिज्ञासा में एक निजी डीएनए किट का उपयोग किया। जब रिपोर्ट आई, तो वह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थी। टेस्ट के नतीजों ने स्पष्ट कर दिया कि उन दोनों के जीन न केवल मेल खाते हैं, बल्कि वे एक ही माता-पिता की संतानें हैं। यह खबर मिलते ही दोनों की आंखों में आंसू आ गए और 40 साल का इंतजार एक झटके में खत्म हो गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक विज्ञान ने उन लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है जो अपने अतीत या खोए हुए परिवार की तलाश में हैं। विशेष रूप से भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय जैसे प्रवासी समूहों के लिए, जो अक्सर अपनी जड़ों की तलाश में रहते हैं, ऐसी तकनीकें काफी मददगार साबित हो रही हैं। ऑस्ट्रेलिया में भी कमर्शियल डीएनए टेस्टिंग का चलन तेजी से बढ़ा है, जिससे कई परिवारों को अपने बिछड़े हुए सदस्यों से मिलने में मदद मिली है।
इस मामले ने एक बार फिर गोद लेने की प्रक्रिया और परिवारों के बीच पारदर्शिता की कमी जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा छेड़ दी है। कई बार प्रशासनिक गलतियों या निजी कारणों से बच्चों को उनके सगे भाई-बहनों से अलग कर दिया जाता है। हालांकि, इस कहानी का अंत सुखद रहा। अब ये दोनों बहनें न केवल अपनी पुरानी यादें ताजा कर रही हैं, बल्कि वे अपने नए परिवार के साथ आने वाले भविष्य की योजनाएं भी बना रही हैं।
यह घटना हमें सिखाती है कि खून के रिश्ते अपनी जगह बनाने का रास्ता ढूंढ ही लेते हैं। विज्ञान और तकनीक ने आज उस दूरी को मिटा दिया है जिसे लोग कभी नामुमकिन मानते थे। आज यह कहानी दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है और लाखों लोगों को यह उम्मीद दे रही है कि सच कभी न कभी सामने जरूर आता है।
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