राजनीति
मैसाचुसेट्स में 24 सप्ताह के बाद गर्भपात को कानूनी मंजूरी: गवर्नर मौरा हीली ने नए विधेयक पर किए हस्ताक्षर
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 01:37 pm

मैसाचुसेट्स की गवर्नर मौरा हीली ने एक ऐतिहासिक विधेयक पर हस्ताक्षर किए हैं, जो राज्य में 24 सप्ताह के बाद भी गर्भपात की अनुमति देता है।
मैसाचुसेट्स की गवर्नर मौरा हीली ने राज्य में प्रजनन अधिकारों को विस्तार देते हुए एक महत्वपूर्ण विधेयक पर हस्ताक्षर किए हैं। इस नए कानून के तहत, राज्य में 24 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद गर्भपात पर लगी पाबंदियों को काफी हद तक हटा दिया गया है। यह निर्णय अमेरिका में 'रो बनाम वेड' के ऐतिहासिक फैसले के पलटने के बाद उपजे कानूनी संघर्षों के बीच आया है। गवर्नर हीली ने इस कदम को महिलाओं की शारीरिक स्वायत्तता और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
इस नए कानून से पहले, मैसाचुसेट्स में 24 सप्ताह के बाद गर्भपात केवल असाधारण परिस्थितियों में ही संभव था। अब यह कानून स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को अधिक विवेक प्रदान करता है, जिससे वे मरीज के शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य और भ्रूण की गंभीर विसंगतियों के आधार पर निर्णय ले सकेंगे। गवर्नर हीली ने हस्ताक्षर समारोह के दौरान कहा कि यह सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है कि स्वास्थ्य संबंधी निर्णय डॉक्टरों और मरीजों के बीच रहें, न कि राजनीतिज्ञों के बीच।
वैश्विक स्तर पर रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। अमेरिका में स्वास्थ्य और प्रजनन नीतियों का असर अक्सर अंतरराष्ट्रीय विमर्श पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह तुलना का विषय है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न राज्यों में गर्भपात संबंधी कानून अलग-अलग हैं। उदाहरण के तौर पर, विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स में गर्भपात के नियम काफी उदार हैं, लेकिन देर से होने वाले गर्भपात के लिए अभी भी दो डॉक्टरों की सहमति आवश्यक होती है। मैसाचुसेट्स का यह कदम इस बहस को और तेज कर सकता है।
भारत के संदर्भ में देखें तो मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) संशोधन अधिनियम, 2021 के तहत भारत में 24 सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति कुछ विशेष श्रेणियों की महिलाओं के लिए दी गई है, जबकि उससे अधिक समय के लिए मेडिकल बोर्ड की अनुमति अनिवार्य है। मैसाचुसेट्स का नया कानून प्रशासनिक बाधाओं को कम कर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास करता है।
हालांकि, इस कानून का विरोध भी शुरू हो गया है। धार्मिक और रूढ़िवादी समूहों ने इसे 'अत्यधिक' करार देते हुए तर्क दिया है कि यह कानून अजन्मे बच्चों के अधिकारों की अनदेखी करता है। विपक्ष का कहना है कि 24 सप्ताह के बाद गर्भपात की अनुमति देना नैतिक रूप से विवादास्पद है। इसके बावजूद, गवर्नर प्रशासन का मानना है कि यह कानून उन परिवारों को राहत देगा जो गर्भावस्था के अंतिम चरणों में गंभीर चिकित्सा जटिलताओं का सामना करते हैं।
ICN24 के पाठकों के लिए यह समझना आवश्यक है कि यह कानून न केवल चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा है, बल्कि यह बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिवेश का भी प्रतीक है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय जो अक्सर दोनों देशों की स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच तुलना करता है, वह इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के व्यापक ढांचे के रूप में देख रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका के अन्य राज्य भी मैसाचुसेट्स के इस मॉडल को अपनाते हैं या कानूनी चुनौतियों का दौर जारी रहता है।
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