ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलियाई चर्च में हड़कंप: पूर्व कैथोलिक बिशप क्रिस्टोफर सॉन्डर्स यौन शोषण के मामलों में दोषी करार
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 09:37 pm

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के ब्रूम क्षेत्र के पूर्व बिशप क्रिस्टोफर सॉन्डर्स को युवा स्वदेशी पुरुषों के साथ यौन शोषण के गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया है।
ऑस्ट्रेलियाई कैथोलिक चर्च के इतिहास में एक बड़े घटनाक्रम में, ब्रूम (Broome) के पूर्व बिशप क्रिस्टोफर सॉन्डर्स को युवा स्वदेशी (Indigenous) पुरुषों के साथ यौन दुर्व्यवहार और शोषण के कई मामलों में दोषी पाया गया है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने सॉन्डर्स को उन आरोपों के लिए सजा सुनाई है, जो दशकों तक उनके प्रभाव और पद के दुरुपयोग की ओर इशारा करते हैं। यह फैसला न केवल ऑस्ट्रेलियाई न्याय प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि धार्मिक संस्थानों में जवाबदेही तय करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्रिस्टोफर सॉन्डर्स, जिन्होंने लगभग दो दशकों तक ब्रूम के डायोसीज का नेतृत्व किया था, ने 2021 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके खिलाफ आरोप तब सामने आए जब वेटिकन द्वारा उनके व्यवहार की आंतरिक जांच शुरू की गई और बाद में पुलिस ने इन मामलों की गहन जांच की। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार, सॉन्डर्स ने अपनी शक्ति और धार्मिक पद का उपयोग कर कमजोर वर्ग के युवाओं को अपना निशाना बनाया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि बिशप ने विश्वास के रिश्ते का उल्लंघन किया और उन लोगों का शोषण किया जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उन पर थी।
यह मामला ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, विशेषकर केरल और गोवा से आए कैथोलिक ईसाइयों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के ईसाइयों की एक बड़ी आबादी है जो स्थानीय चर्चों और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेती है। इस तरह के मामलों ने समुदाय के भीतर धार्मिक नेतृत्व के प्रति विश्वास और सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कई प्रवासी परिवारों का मानना है कि चर्च जैसे पवित्र संस्थानों में इस तरह की नैतिक गिरावट चिंताजनक है और पारदर्शी न्याय व्यवस्था ही इस भरोसे को बहाल कर सकती है।
सॉन्डर्स के खिलाफ कार्यवाही के दौरान यह भी सामने आया कि वे शराब के अत्यधिक सेवन और अनियंत्रित व्यवहार के आदी थे, जिसने उनके पद की गरिमा को नुकसान पहुँचाया। वेटिकन ने पहले ही सॉन्डर्स पर चर्च से संबंधित प्रतिबंध लगा दिए थे, लेकिन अब नागरिक अदालत के फैसले ने उनके लिए जेल की राह आसान कर दी है। ऑस्ट्रेलियाई कैथोलिक बिशप सम्मेलन (ACBC) ने अदालत के फैसले का संज्ञान लिया है और पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वदेशी समुदाय के नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रही यह न्यायिक लड़ाई अंततः सच्चाई की जीत के साथ समाप्त हुई है। हालांकि, आलोचकों का तर्क है कि चर्च प्रशासन को इन संकेतों को बहुत पहले ही पहचान लेना चाहिए था। फिलहाल, सॉन्डर्स को हिरासत में ले लिया गया है और आने वाले दिनों में उनकी अंतिम सजा का निर्धारण किया जाएगा। यह मामला भविष्य में धार्मिक संस्थानों में बाल सुरक्षा और नैतिक आचरण के कड़े मानकों को लागू करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
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