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फीफा वर्ल्ड कप 2026: वीजा की चुनौतियां और महंगे टिकट, लेकिन मैदान पर उत्साह बरकरार
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 04:31 pm
फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत उत्साहपूर्ण रही है, लेकिन वीजा संबंधी चिंताओं और टिकटों की बढ़ती कीमतों ने प्रशंसकों की परेशानी बढ़ा दी है।
फीफा विश्व कप 2026 का आगाज उत्तरी अमेरिका के तीन देशों में एक नई ऊर्जा के साथ हुआ है। हालांकि, मेजबान देशों—अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको—के शुरुआती प्रदर्शन ने प्रशंसकों में जोश भर दिया है, लेकिन मैदान के बाहर की चुनौतियों ने इस भव्य आयोजन पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। विशेष रूप से वीजा संबंधी जटिलताएं, परिवहन की समस्याएं और टिकटों की आसमान छूती कीमतों ने कई फुटबॉल प्रेमियों को निराश किया है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर खेल आयोजनों के लिए लंबी दूरी की यात्रा करते हैं, इस बार का अनुभव मिला-जुला रहा है। सिडनी और मेलबर्न से अमेरिका की यात्रा करने वाले कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रशंसकों ने बताया कि टिकटों की उच्च दरों के कारण उन्हें अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ा है। इसके अलावा, अमेरिका की सख्त आव्रजन नीतियों और वीजा प्रक्रिया में देरी ने उन परिवारों के लिए बाधाएं खड़ी कर दी हैं जो इस खेल महाकुंभ का हिस्सा बनना चाहते थे।
टूर्नामेंट के शुरुआती दिनों में स्टेडियमों के कुछ स्टैंड्स खाली नजर आए, जिसने आयोजकों की चिंता बढ़ा दी है। जानकारों का मानना है कि अत्यधिक गर्मी और एक शहर से दूसरे शहर के बीच लंबी दूरी के कारण भी दर्शक मैदान तक पहुंचने में कतरा रहे हैं। इसके बावजूद, विस्तारित प्रारूप (Expanded Format) के कारण इस बार उन देशों को भी मौका मिला है जो लंबे समय से विश्व कप से बाहर थे, जिससे वैश्विक स्तर पर फुटबॉल की पहुंच बढ़ी है।
आव्रजन प्रवर्तन (Immigration Enforcement) के डर ने भी इस बार के आयोजन को प्रभावित किया है। कई प्रशंसकों में यह डर बना हुआ है कि सीमा नियंत्रण की सख्ती उनके प्रवास को मुश्किल बना सकती है। फीफा और स्थानीय आयोजन समितियों के लिए चुनौती अब यह सुनिश्चित करना है कि आगामी नॉकआउट चरणों में सुरक्षा और सुचारू प्रबंधन के साथ-साथ दर्शकों की संख्या में भी वृद्धि हो।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के खेल प्रशंसकों के लिए यह टूर्नामेंट न केवल फुटबॉल का उत्सव है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा और जटिल आव्रजन कानूनों के बीच सामंजस्य बिठाने की एक परीक्षा भी है। जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आयोजक इन बुनियादी समस्याओं का समाधान निकालकर विश्व कप को एक बड़ी सफलता में बदल पाते हैं या नहीं।
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