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फीफा वर्ल्ड कप 2026: वीजा विवाद और नस्लवाद के आरोपों से मचा वैश्विक हड़कंप

ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 11:30 am
फीफा वर्ल्ड कप 2026: वीजा विवाद और नस्लवाद के आरोपों से मचा वैश्विक हड़कंप

फीफा वर्ल्ड कप 2026 से पहले वीजा देरी और हवाई अड्डों पर कड़ी पूछताछ ने विवाद खड़ा कर दिया है। नस्लवाद के आरोपों के बीच फुटबॉल प्रेमियों में भारी रोष है।

फीफा विश्व कप 2026 के आयोजन में अभी समय शेष है, लेकिन टूर्नामेंट की तैयारियों के बीच प्रशासनिक अव्यवस्था और नस्लभेद के गंभीर आरोपों ने खेल जगत को हिला कर रख दिया है। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस महाकुंभ से पहले वीजा मिलने में हो रही देरी और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच के नाम पर खिलाड़ियों व प्रशंसकों के साथ हो रहे कथित दुर्व्यवहार ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। हालिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के अनुसार, कई देशों के खिलाड़ियों, रेफरी और समर्थकों ने अमेरिका यात्रा के दौरान कड़ी सुरक्षा पूछताछ और वीजा संबंधी बाधाओं का सामना किया है। कई फुटबॉल प्रेमियों ने दावा किया है कि उन्हें घंटों तक पूछताछ के लिए रोका गया, जबकि कुछ को वैध दस्तावेज होने के बावजूद प्रवेश देने से मना कर दिया गया। इन घटनाओं ने न केवल यात्रियों की परेशानी बढ़ाई है, बल्कि अमेरिका की आव्रजन नीतियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का तर्क है कि इस तरह की कठोर प्रक्रियाएं खेल की भावना के विपरीत हैं और एक विशेष पृष्ठभूमि के लोगों को लक्षित करती प्रतीत होती हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से चिंताजनक है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे हजारों भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रशंसक, जो अपनी टीम या पसंदीदा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को देखने के लिए उत्तरी अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं, अब वीजा अनिश्चितता को लेकर डरे हुए हैं। भारतीय पासपोर्ट धारकों या हाल ही में नागरिकता प्राप्त करने वाले प्रवासियों के लिए अक्सर वीजा प्रक्रिया जटिल होती है। यदि टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में प्रशंसक इस ऐतिहासिक अवसर से वंचित रह सकते हैं। नस्लवाद के आरोपों ने इस विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। इंटरनेट पर प्रशंसकों का एक बड़ा वर्ग यह आरोप लगा रहा है कि कुछ विशेष देशों और समुदायों के लोगों के साथ हवाई अड्डों पर असमान व्यवहार किया जा रहा है। फुटबॉल के जानकारों का मानना है कि यदि फीफा और मेजबान देशों ने तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए, तो यह 'ग्लोबल सेलिब्रेशन' विवादों की भेंट चढ़ सकता है। खेल विशेषज्ञों के अनुसार, विश्व कप का उद्देश्य देशों को जोड़ना है, न कि सीमाओं पर भेदभाव पैदा करना। वर्तमान में फीफा और अमेरिकी अधिकारियों की ओर से इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए उम्मीद है कि वीजा प्रोटोकॉल में ढील दी जा सकती है। फुटबॉल प्रेमियों की मांग है कि एक 'विशेष एथलीट और प्रशंसक वीजा' श्रेणी बनाई जाए ताकि बिना किसी भेदभाव और देरी के खेल का आनंद लिया जा सके। आने वाले हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोजक इन चुनौतियों से कैसे निपटते हैं।
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