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EPFO का बड़ा अपडेट: क्या ₹25,000 बेसिक सैलरी पर मिलेगी ज्यादा पेंशन? 10 साल पुराने नियम में बदलाव की तैयारी
ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 03:37 pm

वित्त मंत्रालय ने ईपीएफओ की वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिससे करोड़ों कर्मचारियों की पेंशन और भविष्य निधि में इजाफा होगा।
नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाले करोड़ों औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ (EPF) के तहत अनिवार्य योगदान के लिए वेतन सीमा (Wage Ceiling) को मौजूदा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को अपनी प्रारंभिक मंजूरी दे दी है। इस बदलाव का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा के दायरे को व्यापक बनाना और उन कर्मचारियों को शामिल करना है जो वेतन वृद्धि के कारण इस योजना से बाहर हो गए थे।
वर्तमान नियमों के अनुसार, जिन कर्मचारियों का मूल वेतन (Basic Salary) और महंगाई भत्ता (DA) ₹15,000 तक है, उनके लिए ईपीएफ योजना में शामिल होना अनिवार्य है। यह सीमा अंतिम बार सितंबर 2014 में ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 की गई थी। पिछले एक दशक में औसत वेतन में हुई वृद्धि और मुद्रास्फीति को देखते हुए, कर्मचारी संगठनों द्वारा लंबे समय से इस सीमा को बढ़ाने की मांग की जा रही थी। हालांकि वित्त मंत्रालय ने इसे हरी झंडी दे दी है, लेकिन इसे आधिकारिक रूप से लागू करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिलना अभी बाकी है।
इस प्रस्तावित वृद्धि का सीधा असर कर्मचारियों की पेंशन और भविष्य निधि की बचत पर पड़ेगा। जब वेतन सीमा बढ़ती है, तो ईपीएफ और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) दोनों में योगदान की राशि भी बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारियों के हाथ में एक बड़ा कोष होगा और उनकी मासिक पेंशन में भी उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। विशेष रूप से मध्यम आय वर्ग के कर्मचारियों के लिए यह निर्णय वित्तीय सुरक्षा के लिहाज से मील का पत्थर साबित हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। कई प्रवासी भारतीय (NRIs) ऐसे हैं जिनके परिवार के सदस्य भारत के निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं या स्वयं वे भारत में अपनी पिछली नौकरियों के ईपीएफ खातों को बनाए हुए हैं। भारत के श्रम बाजार और सामाजिक सुरक्षा कानूनों में होने वाले ये बदलाव सीधे तौर पर उन परिवारों की आर्थिक योजना को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा, जो पेशेवर भारत लौटने (Reverse Migration) की योजना बना रहे हैं, उनके लिए बेहतर पेंशन योजनाएं एक आकर्षक कारक साबित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वेतन सीमा को ₹25,000 करने से सरकार पर भी वित्तीय बोझ बढ़ेगा, क्योंकि सरकार कर्मचारी पेंशन योजना में 1.16 प्रतिशत का योगदान देती है। साथ ही, नियोक्ताओं (Employers) के लिए भी लागत बढ़ेगी क्योंकि उन्हें उच्च वेतन आधार पर अपना हिस्सा देना होगा। फिर भी, भारत को एक 'पेंशन-रहित' समाज से सुरक्षित भविष्य की ओर ले जाने के लिए इसे एक आवश्यक कदम माना जा रहा है। आने वाले हफ्तों में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है, जिसके बाद श्रम मंत्रालय अधिसूचना जारी करेगा।
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