ऑस्ट्रेलिया
इलेक्ट्रिक ट्रक्स: पुराने नियमों के कारण ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था को हो रहा अरबों डॉलर का नुकसान
ICN24 Newsroom 14 अग॰ 2026, 08:38 pm

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारी-भरकम इलेक्ट्रिक ट्रकों से जुड़े पुराने कानून ऑस्ट्रेलिया की उत्पादकता में 2 बिलियन डॉलर से अधिक की वृद्धि को रोक रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की गई है। एक हालिया शोध रिपोर्ट के अनुसार, देश के पुराने और कड़े नियम भारी-भरकम इलेक्ट्रिक ट्रकों (Heavy-duty Electric Trucks) को सड़कों पर उतरने से रोक रहे हैं। यदि इन बाधाओं को दूर कर लिया जाए, तो इससे ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था को 2 बिलियन डॉलर से अधिक का 'पेयलोड' यानी उत्पादकता लाभ मिल सकता है।
भारत-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय इस देश के परिवहन, लॉजिस्टिक्स और ट्रकिंग व्यवसायों से जुड़े हुए हैं। मेलबर्न, सिडनी और पर्थ जैसे प्रमुख शहरों में भारतीय मूल के कई उद्यमी अपनी खुद की ट्रांसपोर्ट कंपनियां चलाते हैं। इन व्यवसायों के लिए इलेक्ट्रिक ट्रकों का भविष्य न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह परिचालन लागत को कम करने का एक सुनहरा अवसर भी है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया के भारी वाहन नियम (Heavy Vehicle Regulations) मुख्य रूप से डीजल इंजनों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इलेक्ट्रिक ट्रकों के साथ सबसे बड़ी चुनौती उनकी बैटरी का वजन है। बैटरी का वजन अधिक होने के कारण, ये ट्रक वर्तमान वजन सीमा (Weight Limits) के भीतर उतना सामान नहीं ले जा पाते जितना एक डीजल ट्रक ले जा सकता है। इसका परिणाम यह होता है कि प्रति फेरा (trip) कम सामान पहुंचता है, जिससे उत्पादकता घट जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को इन ट्रकों के लिए एक्सल वजन (Axle weight) और चौड़ाई से संबंधित नियमों में ढील देनी चाहिए। यदि कानून में बदलाव कर इलेक्ट्रिक वाहनों को अतिरिक्त वजन ले जाने की अनुमति दी जाती है, तो ट्रांसपोर्ट कंपनियाँ तेजी से अपनी फ्लीट को इलेक्ट्रिक में बदल सकेंगी। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन कम होगा, बल्कि ईंधन की बचत से छोटे और मध्यम स्तर के ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को बड़ी राहत मिलेगी।
भारतीय मूल के ट्रक चालकों और मालिकों के लिए, जो अक्सर लंबी दूरी के मार्गों पर काम करते हैं, डीजल की बढ़ती कीमतें हमेशा चिंता का विषय रही हैं। इलेक्ट्रिक ट्रकों की ओर रुख करने से उनकी निर्भरता जीवाश्म ईंधन पर कम होगी। हालांकि, इसके लिए चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और अनुकूल कानूनों की सख्त जरूरत है।
सरकार पर अब दबाव बढ़ रहा है कि वह 'नेट जीरो' (Net Zero) लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव करे। उद्योग जगत का मानना है कि यदि ऑस्ट्रेलिया को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहना है, तो उसे आधुनिक तकनीक को अपनाने में देरी नहीं करनी चाहिए। इस 2 बिलियन डॉलर के संभावित लाभ को हासिल करने के लिए नीतिगत सुधार ही एकमात्र रास्ता है, जिससे पूरे देश के साथ-साथ परिवहन क्षेत्र से जुड़े हजारों परिवारों को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
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