ऑस्ट्रेलिया
डाउ जोन्स 51,564.70 के ऐतिहासिक शिखर पर: इंटेल-एप्पल डील और ईरान में युद्धविराम की खबरों से वैश्विक बाजारों में उछाल
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 02:03 am

अमेरिकी शेयर बाजार के सूचकांक डाउ जोन्स ने 51,564.70 का नया रिकॉर्ड बनाया है। इंटेल-एप्पल की बड़ी साझेदारी और ईरान में शांति की उम्मीदों ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है।
वैश्विक वित्तीय बाजारों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा, जब न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) पहली बार 51,564.70 के रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ। इस जबरदस्त उछाल के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारक रहे: दिग्गज चिप निर्माता कंपनी इंटेल और टेक दिग्गज एप्पल के बीच एक बड़ा व्यापारिक समझौता, और मध्य पूर्व से आ रही ईरान युद्धविराम की सकारात्मक खबरें। इन घटनाक्रमों ने न केवल अमेरिकी निवेशकों, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई और भारतीय शेयर बाजारों में भी उत्साह का संचार किया है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इंटेल और एप्पल के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हार्डवेयर को लेकर हुई साझेदारी ने टेक सेक्टर की तस्वीर बदल दी है। इस डील के तहत इंटेल, एप्पल के आगामी उपकरणों के लिए विशेष एआई चिप्स का निर्माण करेगा। इस खबर के आते ही इंटेल के शेयरों में भारी लिवाली देखी गई, जिसका सकारात्मक असर पूरे सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर पड़ा। ऑस्ट्रेलियाई भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले कई पेशेवर और निवेशक अमेरिकी टेक कंपनियों में 'सुपरएनुएशन' (Superannuation) के माध्यम से बड़ा निवेश रखते हैं।
दूसरी ओर, भू-राजनीतिक मोर्चे पर ईरान के साथ संभावित युद्धविराम की खबरों ने तेल की कीमतों में स्थिरता लाने में मदद की है। लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच शांति की आहट ने वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर पैदा हुई चिंताओं को कम किया है। इसका सीधा असर मुद्रास्फीति (Inflation) की दर पर पड़ने की उम्मीद है, जिससे भविष्य में केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। भारतीय बाजारों में भी इसका सकारात्मक असर दिखने की उम्मीद है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल होती है।
हालांकि, इस रिकॉर्ड तेजी के बीच फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीतियों को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। फेड के अधिकारी अभी भी महंगाई दर को 2% के लक्ष्य पर लाने के लिए सतर्क हैं। लेकिन बाजार ने फिलहाल इन चिंताओं को दरकिनार करते हुए तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में आए सुधारों का स्वागत किया है। ऑस्ट्रेलियाई बाजार (ASX) में भी आज सुबह से ही सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है, विशेष रूप से माइनिंग और बैंकिंग सेक्टर में तेजी देखी गई है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय प्रवासियों के लिए, जो अक्सर भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों के बाजारों पर नजर रखते हैं, यह उछाल पोर्टफोलियो की वैल्यू बढ़ाने वाला साबित हुआ है। वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि छुट्टियों के सीजन से ठीक पहले आई यह तेजी बाजार में 'सांता क्लॉज रैली' की शुरुआत हो सकती है। कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद तकनीक और कूटनीति के संगम ने शेयर बाजार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को अब फेडरल रिजर्व के अगले कदमों और ईरान की आधिकारिक घोषणाओं पर करीब से नजर रखनी चाहिए।
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