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पीरियड्स में देरी के प्रमुख कारण: क्या वजन, उम्र और खान-पान डाल रहे हैं आपके स्वास्थ्य पर असर?
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 12:49 am

पीरियड्स में देरी महिलाओं के लिए चिंता का विषय हो सकती है। जानें कैसे वजन, उम्र और खान-पान आपके मासिक चक्र को प्रभावित करते हैं और डॉक्टर की सलाह कब जरूरी है।
महिलाओं के शारीरिक और प्रजनन स्वास्थ्य में मासिक धर्म यानी पीरियड्स एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्राकृतिक प्रक्रिया है। एक सामान्य चक्र आमतौर पर 21 से 35 दिनों का होता है, लेकिन कई बार महिलाओं को पीरियड्स में देरी या अनियमितता का सामना करना पड़ता है। हालांकि गर्भावस्था इसका एक सामान्य कारण है, लेकिन इसके अलावा भी कई स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े कारक हैं जो आपके मासिक चक्र को प्रभावित कर सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली भारतीय मूल की महिलाओं के लिए, बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतें अक्सर इस समस्या का केंद्र होती हैं।
पीरियड्स में देरी का सबसे बड़ा और प्रमुख कारण वजन में अचानक बदलाव है। शरीर में फैट की मात्रा सीधे तौर पर एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित करती है। यदि आपका वजन बहुत कम है, तो शरीर पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाता, जिससे ओव्यूलेशन रुक सकता है। दूसरी ओर, वजन अधिक होने या अचानक वजन बढ़ने से शरीर में इंसुलिन और अन्य हार्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है, जो पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है। ऑस्ट्रेलिया की 'फिटनेस संस्कृति' और कभी-कभी 'क्रैश डाइटिंग' भी इस असंतुलन का कारण बनती है।
उम्र एक दूसरा महत्वपूर्ण कारक है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। किशोरावस्था की शुरुआत में, यानी जब पीरियड्स शुरू होते हैं, तो शरीर को एक नियमित चक्र स्थापित करने में एक से दो साल का समय लग सकता है। इसी तरह, 40 वर्ष की आयु के बाद महिलाएं 'पेरिमेनोपॉज' के चरण में प्रवेश करती हैं। इस दौरान शरीर में हार्मोन का स्तर उतार-चढ़ाव भरा रहता है, जिससे पीरियड्स की तारीखें अनिश्चित हो जाती हैं। यह रजोनिवृत्ति (Menopause) की ओर बढ़ने का एक प्राकृतिक संकेत है, जिसे सही जानकारी के साथ प्रबंधित किया जा सकता है।
तीसरा मुख्य कारण हमारी खान-पान की आदतें और तनाव है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, विशेषकर विदेशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए, काम और व्यक्तिगत जीवन का संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। पोषक तत्वों की कमी, विशेष रूप से आयरन और विटामिन बी12, जो भारतीय शाकाहारी आहार में अक्सर कम पाए जाते हैं, मासिक चक्र को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, अत्यधिक मानसिक तनाव 'कोर्टिसोल' हार्मोन को बढ़ाता है, जो सीधे उस मस्तिष्क के हिस्से को प्रभावित करता है जो पीरियड्स को नियंत्रित करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपके पीरियड्स लगातार तीन महीनों से अधिक समय तक नहीं आए हैं, या यदि चक्र में अचानक भारी बदलाव महसूस हो रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करना अनिवार्य है। ऑस्ट्रेलिया में, महिलाएं अपने जनरल प्रैक्टिशनर (GP) से सलाह ले सकती हैं जो हार्मोन प्रोफाइल और अल्ट्रासाउंड के जरिए सही कारण का पता लगा सकते हैं। स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन के जरिए अधिकांश मामलों में इसे ठीक किया जा सकता है।
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