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आज का पंचांग 12 जुलाई 2026: रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और विशेष महत्व

ICN24 Newsroom 12 जुल॰ 2026, 12:31 pm
आज का पंचांग 12 जुलाई 2026: रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का दुर्लभ संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और विशेष महत्व

12 जुलाई 2026 को रवि प्रदोष और मासिक शिवरात्रि का महासंयोग बन रहा है। जानें इस दिन के शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के लिए इसका महत्व।

12 जुलाई 2026, रविवार का दिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रहा है। इस दिन रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का एक दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे हिंदू धर्मग्रंथों में भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। इसके साथ ही इस दिन रोहिणी व्रत भी मनाया जाएगा, जो इस तिथि की धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देता है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ सहित ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न शहरों में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का यह एक विशेष अवसर है। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का समापन और चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ इसी दिन हो रहा है। जब प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे 'रवि प्रदोष' कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और सूर्य देव की कृपा से मान-सम्मान में वृद्धि होती है। वहीं, मासिक शिवरात्रि का संयोग होने से भक्तों को महादेव और माता पार्वती का संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। 12 जुलाई 2026 को पंचांग गणना के अनुसार, नक्षत्र 'रोहिणी' रहेगा, जो ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शुभ माना जाता है। रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जो स्वयं भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हैं। इस दिन 'वृद्धि योग' का निर्माण हो रहा है, जिसमें किए गए मांगलिक कार्य और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। ऑस्ट्रेलिया में समय के अंतर (Time Difference) को देखते हुए, श्रद्धालुओं को स्थानीय पंचांग के अनुसार ही पूजा का संकल्प लेना चाहिए। शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजित मुहूर्त इस दिन का सबसे श्रेष्ठ समय होगा। दोपहर के समय पड़ने वाला यह मुहूर्त किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए उपयुक्त है। हालांकि, राहुकाल के समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। रविवार को राहुकाल सामान्यतः शाम के समय होता है, जिस दौरान किसी भी शुभ कार्य या नई शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। शिव पूजा के लिए प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) सबसे प्रभावी माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के लोग अक्सर सप्ताहांत (Weekend) पर मंदिरों में एकत्रित होते हैं। रविवार होने के कारण, इस वर्ष शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। पंचांग के इन बारीक विवरणों का पालन करना न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है, बल्कि यह विदेशों में रह रही नई पीढ़ी को भी अपनी प्राचीन गणना पद्धतियों और परंपराओं से अवगत कराने का एक सशक्त माध्यम है।
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