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समाज सेवी शंभू प्रसाद के निधन से शोक की लहर, बिहार के नोखा में दी गई अंतिम विदाई

ICN24 Newsroom 18 अग॰ 2026, 04:39 pm
समाज सेवी शंभू प्रसाद के निधन से शोक की लहर, बिहार के नोखा में दी गई अंतिम विदाई

बिहार के रोहतास जिले के नोखा में प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता शंभू प्रसाद के निधन से क्षेत्र में शोक व्याप्त है। उनके कार्यों को याद करते हुए स्थानीय नेताओं और प्रवासियों ने दुख जताया है।

बिहार के रोहतास जिले के अंतर्गत आने वाले नोखा नगर परिषद क्षेत्र में आज उस समय शोक की लहर दौड़ गई, जब प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ नागरिक शंभू प्रसाद शौडिक के निधन की खबर सामने आई। नोखा के वार्ड संख्या 20 स्थित मुख्य बाजार निवासी शंभू प्रसाद पिछले काफी समय से क्षेत्र की सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय थे। उनके निधन को स्थानीय समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। शंभू प्रसाद केवल एक वरिष्ठ नागरिक ही नहीं, बल्कि नोखा की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना के स्तंभ थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों और आम जनता का उनके निवास पर तांता लग गया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वे मृदुभाषी स्वभाव के थे और हमेशा समाज के वंचित वर्गों की मदद के लिए तत्पर रहते थे। उनके योगदान को याद करते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्होंने नोखा के विकास और सामुदायिक सद्भाव को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राजनीतिक गलियारों में भी उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया गया है। बिहार विधानसभा की आवास समिति और स्थानीय प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट की हैं। नेताओं का कहना है कि शंभू प्रसाद जैसे निस्वार्थ कार्यकर्ता का जाना समाज के लिए एक बड़ा घाटा है। उनकी अंतिम यात्रा में भारी संख्या में लोग शामिल हुए, जो उनकी लोकप्रियता और समाज के प्रति उनके समर्पण का प्रत्यक्ष प्रमाण था। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर बिहार मूल के प्रवासियों के लिए ऐसी खबरें गहरी संवेदना का विषय होती हैं। प्रवासी भारतीय अक्सर अपनी जड़ों और अपने गृह नगर के उन बुजुर्गों से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं जिन्होंने समाज को दिशा देने का काम किया हो। सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले नोखा और रोहतास क्षेत्र के प्रवासियों ने डिजिटल माध्यमों से अपनी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उनका मानना है कि शंभू प्रसाद जैसे लोग ही गांव और शहरों की साख बचाए रखते हैं। शंभू प्रसाद शौडिक का जाना एक ऐसे युग का अंत माना जा रहा है जहाँ व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर सामुदायिक कल्याण को प्राथमिकता दी जाती थी। उनके परिवार में इस समय शोक का माहौल है, और पूरा नोखा शहर इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़ा नजर आ रहा है। उनकी स्मृति में स्थानीय स्तर पर शोक सभाओं का आयोजन भी किया जा रहा है, जहाँ उनके जीवन संघर्ष और सामाजिक कार्यों को याद किया जा रहा है।
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