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शिक्षा छूटी पर हौसला नहीं: स्कूल ड्रॉपआउट से मददगार बनने तक का रजनीकांत का सफर

ICN24 Newsroom 18 अग॰ 2026, 04:39 pm
शिक्षा छूटी पर हौसला नहीं: स्कूल ड्रॉपआउट से मददगार बनने तक का रजनीकांत का सफर

गरीबी के कारण बीच में ही पढ़ाई छोड़ने वाले रजनीकांत आज समाज के लिए मिसाल बन चुके हैं। उनकी संघर्ष और परोपकार की यह कहानी भारतीय समुदाय को प्रेरित कर रही है।

कहा जाता है कि परिस्थितियां मनुष्य को तोड़ती नहीं, बल्कि उसे गढ़ती हैं। रजनीकांत की जीवन यात्रा इस बात का जीता-जागता प्रमाण है। एक समय था जब घोर गरीबी और आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी। आज वही रजनीकांत न केवल अपने पैरों पर खड़े हैं, बल्कि समाज के उन वंचित वर्गों के लिए 'मददगार हाथ' बन चुके हैं, जो उन्हीं की तरह मुश्किल हालातों से जूझ रहे हैं। यह कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता की नहीं है, बल्कि उस जज्बे की है जो अभावों के बीच भी दूसरों के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है। रजनीकांत का बचपन उन चुनौतियों से भरा था, जिन्हें देख कर कोई भी हिम्मत हार सकता था। घर की माली हालत इतनी खराब थी कि दो वक्त की रोटी और स्कूल की फीस के बीच चुनाव करना असंभव हो गया। आखिरकार, भारी मन से उन्होंने अपनी किताबों को अलविदा कह दिया। शिक्षा का अधिकार छिन जाना किसी भी बच्चे के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं होता, लेकिन रजनीकांत ने इसे अंत नहीं, बल्कि एक नए संघर्ष की शुरुआत माना। उन्होंने छोटे-मोटे काम करना शुरू किया, कड़ी मेहनत की और धीरे-धीरे सफलता की सीढ़ियां चढ़ीं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह कहानी विशेष महत्व रखती है। प्रवासी समुदाय के कई लोग अपने शुरुआती दिनों में इसी तरह के संघर्षों से गुजरते हैं। अपनी जड़ों को छोड़कर एक नए देश में शून्य से शुरुआत करना और फिर सफलता पाकर समाज को वापस लौटाना (Giving Back), भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग रहा है। रजनीकांत ने अपनी सफलता के बाद पीछे मुड़कर देखा और उन बच्चों के हाथ थामने का फैसला किया जो गरीबी के कारण शिक्षा से वंचित हो रहे थे। आज वे कई बच्चों की शिक्षा का खर्च उठा रहे हैं और उनके लिए बेहतर भविष्य की नींव रख रहे हैं। उनकी इस पहल ने न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी भारतीय समुदाय का ध्यान खींचा है। रजनीकांत का मानना है कि शिक्षा ही वह एकमात्र औजार है जो गरीबी के चक्र को तोड़ सकता है। वे कहते हैं कि उन्होंने जो खोया, वह किसी और को न खोना पड़े, यही उनके जीवन का लक्ष्य है। उनकी परोपकारी गतिविधियों में केवल वित्तीय सहायता ही शामिल नहीं है, बल्कि वे युवाओं को कौशल विकास और करियर परामर्श भी प्रदान करते हैं। ICN24 के माध्यम से हम ऐसी कहानियों को इसलिए साझा करते हैं ताकि समाज में सकारात्मकता का संचार हो सके। रजनीकांत की यह यात्रा हमें सिखाती है कि चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो, यदि आपके इरादे नेक हैं और आप में करुणा है, तो आप न केवल अपना भाग्य बदल सकते हैं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक उम्मीद की किरण बन सकते हैं। उनका यह सफर उन सभी के लिए एक संदेश है जो मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं—कि गिरना हार नहीं है, बल्कि गिरकर न उठना ही असली हार है।
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