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बिहार सरकार का सुप्रीम कोर्ट में दावा: सिवान प्रदर्शन के दौरान केवल हवा में चली थी AK-47

ICN24 Newsroom 18 अग॰ 2026, 04:37 pm
बिहार सरकार का सुप्रीम कोर्ट में दावा: सिवान प्रदर्शन के दौरान केवल हवा में चली थी AK-47

बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर सिवान में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई फायरिंग का बचाव किया है।

बिहार सरकार ने पिछले महीने सिवान में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। राज्य सरकार द्वारा दायर एक हलफनामे में स्पष्ट किया गया है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने एके-47 (AK-47) राइफलों का उपयोग किया था, लेकिन यह फायरिंग केवल भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हवा में की गई थी। सरकार ने पुलिस बर्बरता के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए यह कदम अनिवार्य था। यह मामला तब चर्चा में आया जब सिवान में छात्रों के एक उग्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने निहत्थे छात्रों पर अत्यधिक बल का प्रयोग किया और घातक हथियारों से सीधे फायरिंग की। इन आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसके जवाब में राज्य सरकार ने यह हलफनामा पेश किया है। सरकार का तर्क है कि प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे, जिससे पुलिस को आत्मरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने पड़े। हलफनामे के अनुसार, पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी थी और लाठीचार्ज के जरिए भीड़ को हटाने की कोशिश की थी। जब स्थिति अनियंत्रित हो गई और सुरक्षा बलों पर पथराव शुरू हुआ, तब जाकर हवाई फायरिंग का निर्णय लिया गया। बिहार सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया है कि किसी भी व्यक्ति को सीधे निशाना बनाकर गोली नहीं चलाई गई थी। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भीड़ प्रबंधन के लिए एके-47 जैसे युद्ध-स्तर के हथियारों का उपयोग करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है और यह पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ी खामी को दर्शाता है। भारत की आंतरिक सुरक्षा और पुलिस प्रशासन की यह घटना ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेषकर बिहार से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई अक्सर अपने गृह राज्यों की कानून-व्यवस्था और मानवाधिकार स्थितियों पर चिंता व्यक्त करते रहते हैं। सामुदायिक मंचों पर इस बात को लेकर बहस छिड़ी हुई है कि क्या आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए सैन्य-ग्रेड हथियारों का उपयोग उचित है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के दावों की सत्यता और पुलिस द्वारा अपनाए गए प्रोटोकॉल की समीक्षा करेगा। अदालत यह भी देख सकती है कि क्या स्थिति वास्तव में इतनी गंभीर थी कि एके-47 का प्रयोग करना पड़ा। फिलहाल, बिहार सरकार ने अपने जवाब में पुलिस की कार्रवाई को नियमसम्मत और तात्कालिक आवश्यकता बताया है। इस मामले का फैसला भविष्य में भारत में भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले हथियारों के दिशानिर्देशों को प्रभावित कर सकता है।
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