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कैनबरा में आवास संकट की भयावह तस्वीर: 'गरम बिस्तर' की तलाश में शख्स ने ट्रांम के सामने लगाई छलांग

ICN24 Newsroom 3 अग॰ 2026, 07:37 am
कैनबरा में आवास संकट की भयावह तस्वीर: 'गरम बिस्तर' की तलाश में शख्स ने ट्रांम के सामने लगाई छलांग

कैनबरा में एक बेघर व्यक्ति ने अस्पताल में बिस्तर पाने के लिए जानबूझकर ट्रांम के सामने छलांग लगा दी, जो ऑस्ट्रेलिया में गहराते आवास संकट को दर्शाता है।

ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने देश में गहराते आवास और बेघर संकट की पोल खोल दी है। हैवलॉक हाउसिंग (Havelock Housing) के सीईओ एंड्रयू डेवेनिश-मेयर्स ने खुलासा किया है कि एक व्यक्ति ने केवल एक 'गरम बिस्तर' और छत पाने की हताशा में खुद को लाइट रेल (ट्रांम) के सामने झोंक दिया। यह घटना उस मानसिक और शारीरिक दबाव को दर्शाती है जिससे ऑस्ट्रेलिया में बेघर लोग गुजर रहे हैं। डेवेनिश-मेयर्स ने कैनबरा टाइम्स को बताया कि यह घटना कोई सामान्य दुर्घटना नहीं थी, बल्कि मदद के लिए एक हताश पुकार थी। उन्होंने कहा कि उस व्यक्ति के पास रहने के लिए कोई जगह नहीं थी और कड़कड़ाती ठंड में सड़क पर रात बिताने के बजाय उसने अस्पताल के बिस्तर को प्राथमिकता दी। यह मामला तब सामने आया है जब कैनबरा और ऑस्ट्रेलिया के अन्य बड़े शहरों में किराए की कीमतें आसमान छू रही हैं और सामाजिक आवास (social housing) की भारी कमी है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय, विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय छात्र और नए प्रवासी, भी इस आवास संकट से अछूते नहीं हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों के बाद अब कैनबरा में भी रहने की लागत (cost of living) एक बड़ी चुनौती बन गई है। भारतीय छात्र अक्सर कम आय और उच्च किराए के कारण 'रेंटल स्ट्रेस' का सामना करते हैं। हालांकि ट्रांम वाली यह घटना एक चरम स्थिति है, लेकिन यह उस अस्थिरता की याद दिलाती है जिससे कई प्रवासी समुदाय जूझ रहे हैं। अक्सर जानकारी के अभाव या भाषाई बाधाओं के कारण नए प्रवासी सहायता सेवाओं तक नहीं पहुंच पाते। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में 'वर्किंग पुअर' यानी काम करने वाले गरीबों की संख्या बढ़ रही है। कई लोग ऐसे हैं जिनके पास रोजगार तो है, लेकिन उनकी आय इतनी नहीं है कि वे निजी बाजार में किराया चुका सकें। हैवलॉक के सीईओ के अनुसार, जब तक सरकार सामाजिक आवास के बुनियादी ढांचे में बड़ा निवेश नहीं करती, तब तक ऐसी दुखद घटनाएं होती रहेंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा संकट केवल आर्थिक नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट बन चुका है। कैनबरा में इस समय ठंड का मौसम अपने चरम पर है, जिससे बेघर लोगों के लिए जीवन और भी कठिन हो गया है। स्थानीय प्रशासन और चैरिटी संस्थाएं अतिरिक्त बेड उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन मांग आपूर्ति से कहीं अधिक है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय की सामाजिक संस्थाओं ने भी अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति इस तरह के मानसिक दबाव या आवास की समस्या से जूझ रहा है, तो वह तुरंत सामुदायिक सहायता समूहों या हेल्पलाइन से संपर्क करे।
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