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कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: अभिषेक बनर्जी को 15 जुलाई को देना होगा अपनी आवाज का नमूना

ICN24 Newsroom 11 जुल॰ 2026, 09:31 pm
कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: अभिषेक बनर्जी को 15 जुलाई को देना होगा अपनी आवाज का नमूना

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को चुनाव प्रचार के दौरान कथित डराने-धमकाने वाले बयानों के मामले में आवाज का नमूना देने का निर्देश दिया है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को एक बड़ा निर्देश जारी किया है। न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की एकल पीठ ने बनर्जी को 15 जुलाई को अपनी आवाज का नमूना (voice sample) देने का आदेश दिया है। यह निर्देश उन आरोपों के संबंध में है जिनमें दावा किया गया है कि बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान डराने-धमकाने वाले और भड़काऊ बयान दिए थे। अदालत का यह फैसला उस समय आया है जब केंद्रीय जांच एजेंसियां पश्चिम बंगाल में विभिन्न मामलों की जांच कर रही हैं। जांच अधिकारियों का तर्क है कि वॉयस सैंपलिंग के माध्यम से वे उस ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता की पुष्टि करना चाहते हैं, जिसमें कथित तौर पर बनर्जी की आवाज है। कानून के विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रक्रिया डिजिटल साक्ष्य की पुष्टि के लिए अनिवार्य हो जाती है, विशेष रूप से जब मामला सार्वजनिक सुरक्षा और राजनीतिक गरिमा से जुड़ा हो। अभिषेक बनर्जी, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के दूसरे सबसे शक्तिशाली नेता माने जाते हैं, पिछले कुछ समय से कई कानूनी लड़ाइयों का सामना कर रहे हैं। हालांकि टीएमसी नेतृत्व ने इन आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है, लेकिन उच्च न्यायालय के इस ताजा आदेश ने पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। न्यायमूर्ति सिन्हा ने स्पष्ट किया कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाना आवश्यक है। इस मामले का महत्व न केवल भारत में बल्कि विदेशों में बसे भारतीय प्रवासियों के बीच भी काफी है। ऑस्ट्रेलिया के बड़े शहरों जैसे सिडनी, मेलबर्न और पर्थ में रहने वाले बंगाली समुदाय के लोग पश्चिम बंगाल की राजनीतिक गतिविधियों पर गहरी नजर रखते हैं। ICN24 से बात करते हुए, सिडनी में रहने वाले कुछ समुदाय के सदस्यों ने कहा कि बंगाल की राजनीति का सीधा असर वहां की सामाजिक संरचना और प्रवासियों के अपने गृह राज्य से जुड़ाव पर पड़ता है। ऐसे में भ्रष्टाचार और डराने-धमकाने के आरोपों पर कानूनी स्पष्टता आना अत्यंत आवश्यक है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आवाज का नमूना मेल खाता है, तो यह मामले की दिशा बदल सकता है। दूसरी ओर, बनर्जी के वकीलों ने तर्क दिया कि यह व्यक्तिगत गोपनीयता और अधिकारों का उल्लंघन है, लेकिन अदालत ने जांच के हित को सर्वोपरि रखा। अब सभी की निगाहें 15 जुलाई पर टिकी हैं, जब यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में चल रही राजनीतिक खींचतान को और तेज कर सकता है। राज्य में आगामी स्थानीय चुनावों और सांगठनिक बदलावों के बीच, शीर्ष नेतृत्व पर कानूनी दबाव टीएमसी की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
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