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भाकियू (भानु) का राष्ट्रीय सम्मेलन: एडवोकेट मनोज मावी को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बने राष्ट्रीय महासचिव

ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 08:31 pm
भाकियू (भानु) का राष्ट्रीय सम्मेलन: एडवोकेट मनोज मावी को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बने राष्ट्रीय महासचिव

हरिद्वार में आयोजित भारतीय किसान यूनियन (भानु) के सम्मेलन में एडवोकेट मनोज मावी को संगठन का नया राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया है।

धर्मनगरी हरिद्वार में आयोजित भारतीय किसान यूनियन (भानु) के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में संगठन के ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इस सम्मेलन के दौरान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज मावी को संगठन का नया राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया है। इस घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया और समर्थकों ने मावी का फूल-मालाओं से स्वागत किया। नवनियुक्त राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट मनोज मावी ने पदभार संभालते ही अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य किसानों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें कानूनी रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वह भारतीय किसान यूनियन (भानु) के लिए एक 'कानूनी कवच' के रूप में कार्य करेंगे। मावी के अनुसार, देश के अन्नदाता अक्सर जटिल कानूनी प्रक्रियाओं और भूमि अधिग्रहण जैसे मामलों में उलझ जाते हैं, जहाँ उन्हें सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा कि संगठन को आधुनिक समय की चुनौतियों से निपटने के लिए युवा और शिक्षित नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि मनोज मावी का कानूनी अनुभव संगठन को एक नई दिशा प्रदान करेगा और अदालतों में किसानों की आवाज को और अधिक मजबूती से बुलंद करेगा। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और दिल्ली सहित कई राज्यों के किसान प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस नियुक्ति का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि हाल के वर्षों में किसान आंदोलन केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में भी महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयां लड़ी जा रही हैं। मनोज मावी जैसे कानूनी विशेषज्ञ का शीर्ष पद पर आना इस बात का संकेत है कि किसान यूनियन अब अपनी रणनीति में 'कानूनी सक्रियता' को प्राथमिकता दे रही है। भारत की कृषि राजनीति और किसान संगठनों की गतिविधियों पर प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग गहरी नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई प्रवासी उत्तर भारत के कृषि प्रधान राज्यों से संबंध रखते हैं। उनके लिए भारत में किसान संगठनों का सशक्त होना और शिक्षित नेतृत्व का आगे आना एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जाता है, क्योंकि ग्रामीण विकास और किसानों का कल्याण सीधे तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। सम्मेलन के समापन पर संगठन की आगामी रणनीतियों पर भी चर्चा की गई, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और कर्ज माफी जैसे पुराने मुद्दों के साथ-साथ किसानों को डिजिटल और कानूनी साक्षरता प्रदान करने पर जोर दिया गया।
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