राजनीति
आज राज्यसभा में पेश होगा एंटी-पेपर लीक बिल: क्या मोदी सरकार के पास है पर्याप्त बहुमत?
ICN24 Newsroom 30 जुल॰ 2026, 07:36 pm

लोकसभा से पारित होने के बाद मोदी सरकार आज राज्यसभा में सख्त एंटी-पेपर लीक बिल पेश करेगी। जानें क्या है सदन का गणित।
नई दिल्ली: देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक की घटनाओं को लेकर मचे घमासान के बीच, केंद्र की मोदी सरकार आज यानी 30 जुलाई को राज्यसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पेश करने जा रही है। लोकसभा में भारी हंगामे और विपक्षी वॉकआउट के बावजूद यह बिल पहले ही पास हो चुका है, लेकिन उच्च सदन यानी राज्यसभा में सरकार के लिए राह कितनी आसान होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
हाल के महीनों में नीट (NEET) और नेट (NET) जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों ने भारतीय शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद छात्रों और अभिभावकों के देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया था। इसी दबाव के बीच सरकार ने परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दोषियों को कड़ी सजा देने के उद्देश्य से इस नए और सख्त संशोधन विधेयक को लाने का फैसला किया है। इस कानून के तहत पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले संगठित समूहों के लिए 10 साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
राज्यसभा में इस समय बहुमत का गणित काफी दिलचस्प है। हालांकि भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) के पास लोकसभा में स्पष्ट बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में समीकरण थोड़े अलग हैं। विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' (I.N.D.I.A.) ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार की है। विपक्ष की मांग है कि केवल कानून बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पिछले पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। हालांकि, जानकारों का मानना है कि बीजू जनता दल (BJD) और वाईएसआर कांग्रेस जैसे क्षेत्रीय दलों के रुख पर निर्भर करेगा कि बिल कितनी आसानी से पारित होता है। फिलहाल, भाजपा को उम्मीद है कि वह कुछ निर्दलीय और मित्र दलों के समर्थन से जादुई आंकड़ा पार कर लेगी।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हजारों प्रवासी भारतीय परिवार आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हैं और उनके बच्चे भारत में उच्च शिक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। मेलबर्न और सिडनी में बसे कई भारतीय प्रवासियों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है कि परीक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार से मेधावी छात्रों का भविष्य अंधकार में पड़ सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते सहयोग के बीच, भारत की राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
विधेयक में परीक्षा केंद्रों के लिए कड़े मानक और डिजिटल निगरानी के सुझाव भी शामिल हैं। सरकार का तर्क है कि यह बिल भविष्य में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए एक बड़ा सबक साबित होगा। अब देखना यह है कि आज उच्च सदन में चर्चा के दौरान सरकार विपक्ष के तीखे सवालों का सामना कैसे करती है और क्या यह बिल कानून का रूप ले पाता है।
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