लाइव
ब्रेकिंग न्यूज़
ब्रेकिंग न्यूज़ब्रेकिंग

बिल्डर को फ्लैट खरीदार को 21.18 लाख रुपये लौटाने का आदेश: करनाल उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला

ICN24 Newsroom 30 जुल॰ 2026, 06:36 pm
बिल्डर को फ्लैट खरीदार को 21.18 लाख रुपये लौटाने का आदेश: करनाल उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला

करनाल के जिला उपभोक्ता आयोग ने एक रियल एस्टेट कंपनी को फ्लैट खरीदार के 21.18 लाख रुपये वापस करने का निर्देश दिया है, क्योंकि दोनों पक्ष अनुबंध की शर्तों का पालन करने में विफल रहे।

करनाल, हरियाणा: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। आयोग ने एक रियल एस्टेट कंपनी को आदेश दिया है कि वह एक फ्लैट खरीदार को 21.18 लाख रुपये की राशि वापस करे। यह फैसला उस मामले में आया है जहां आयोग ने पाया कि न केवल बिल्डर, बल्कि खरीदार भी आवास अनुबंध (Housing Agreement) के तहत अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रहा था। यह मामला कुरुक्षेत्र के इस्माइलाबाद निवासी दिनेश कुमार द्वारा दायर किया गया था। शिकायत के अनुसार, कुमार ने करनाल में एक आवासीय परियोजना में फ्लैट बुक किया था और समय-समय पर कुल 21.18 लाख रुपये का भुगतान किया था। हालांकि, बाद में परियोजना में देरी और अनुबंध की शर्तों को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। बिल्डर का तर्क था कि खरीदार ने किस्तों के भुगतान में देरी की, जबकि खरीदार का आरोप था कि निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हुआ और आवश्यक अनुमतियों का अभाव था। सुनवाई के दौरान, आयोग ने दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन किया और पाया कि इस मामले में 'दोनों पक्षों की ओर से विफलता' (Mutual Default) हुई थी। आयोग ने स्पष्ट किया कि जहां एक ओर खरीदार ने भुगतान की समय-सीमा का उल्लंघन किया, वहीं दूसरी ओर बिल्डर भी निर्धारित समय के भीतर परियोजना को पूरा करने या समझौते के अनुसार सुविधाएं प्रदान करने में विफल रहा। कानून के अनुसार, यदि दोनों पक्ष दोषी पाए जाते हैं, तो न्याय का सिद्धांत यह कहता है कि खरीदार को उसकी जमा राशि वापस मिलनी चाहिए, ताकि किसी एक पक्ष को अनुचित लाभ न हो। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय (Indian-Australian community) के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले कई प्रवासी भारतीय (NRIs) अक्सर हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश करते हैं। कई बार जानकारी के अभाव या दूरी के कारण, वे बिल्डरों के साथ कानूनी विवादों में फंस जाते हैं। यह फैसला स्पष्ट करता है कि भारतीय उपभोक्ता कानून केवल बिल्डर की गलती पर ही नहीं, बल्कि अनुबंध की समग्र स्थिति पर विचार करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में NRIs को निवेश करने से पहले 'रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी' (RERA) के पंजीकरण और परियोजना की प्रगति की नियमित जांच करनी चाहिए। करनाल आयोग का यह आदेश उन निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत है जो निर्माण में देरी और जटिल कानूनी शर्तों के कारण अपने निवेश को असुरक्षित महसूस कर रहे थे। आयोग ने बिल्डर को निर्देश दिया है कि वह इस राशि का भुगतान निर्धारित अवधि के भीतर करे, अन्यथा उसे ब्याज भी देना पड़ सकता है। निष्कर्ष के तौर पर, यह मामला याद दिलाता है कि फ्लैट खरीदारों और डेवलपर्स के बीच का समझौता केवल कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि एक कानूनी प्रतिबद्धता है। आयोग ने इस फैसले के माध्यम से यह संदेश दिया है कि अनुबंध की शर्तों का पालन न करना दोनों पक्षों के लिए महंगा साबित हो सकता है, और उपभोक्ता अदालतों का प्राथमिक उद्देश्य न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करना है।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

राज्यसभा में आज पेश होगा एंटी-पेपर लीक बिल: क्या एनडीए पार कर पाएगी बहुमत की अग्निपरीक्षा?
ब्रेकिंगब्रेकिंग

राज्यसभा में आज पेश होगा एंटी-पेपर लीक बिल: क्या एनडीए पार कर पाएगी बहुमत की अग्निपरीक्षा?

लोकसभा से पारित होने के बाद मोदी सरकार आज राज्यसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) विधेयक' पेश करेगी। जानिए सदन का समीकरण और छात्रों के लिए इसके मायने।

30 जुल॰ 2026, 07:36 pm
तेलंगाना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: क्रेडिट कार्ड बकाया न चुकाना 'कदाचार' नहीं, बैंक अधिकारी की जबरन सेवानिवृत्ति रद्द
ब्रेकिंगब्रेकिंग

तेलंगाना हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: क्रेडिट कार्ड बकाया न चुकाना 'कदाचार' नहीं, बैंक अधिकारी की जबरन सेवानिवृत्ति रद्द

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने यूनियन बैंक के एक अधिकारी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को रद्द करते हुए स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत ऋण चुकाने में विफलता को पेशेवर कदाचार नहीं माना जा सकता।

30 जुल॰ 2026, 05:36 pm
विदेशी शिक्षा के लिए वीजा अनिश्चितता के बावजूद एजुकेशन लोन की मांग में 20% का उछाल
ब्रेकिंगब्रेकिंग

विदेशी शिक्षा के लिए वीजा अनिश्चितता के बावजूद एजुकेशन लोन की मांग में 20% का उछाल

अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के लिए वीजा नियमों में सख्ती और अनिश्चितता के बावजूद, भारतीय छात्रों के बीच विदेशी शिक्षा ऋण की मांग में 20% की भारी वृद्धि देखी गई है।

30 जुल॰ 2026, 04:36 pm