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एशियाई बाजारों में उथल-पुथल के बीच मामूली बढ़त: अमेरिकी फेड की नीतियों ने बढ़ाई अनिश्चितता

ICN24 Newsroom 30 जुल॰ 2026, 02:35 pm
एशियाई बाजारों में उथल-पुथल के बीच मामूली बढ़त: अमेरिकी फेड की नीतियों ने बढ़ाई अनिश्चितता

एशिया-प्रशांत बाजारों में शुक्रवार को सुधार देखा गया, लेकिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर बनी अनिश्चितता से निवेशकों में चिंता बनी हुई है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयर बाजारों में पिछले कुछ दिनों की भारी गिरावट के बाद शुक्रवार को मामूली सुधार दर्ज किया गया। हालांकि, इस बढ़त के बावजूद बाजार में स्थिरता का अभाव साफ नजर आ रहा है। जापान के निक्केई (Nikkei) सूचकांक और अन्य प्रमुख एशियाई इंडेक्स में सुधार तो हुआ है, लेकिन निवेशकों की नजरें अभी भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदमों पर टिकी हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। शुक्रवार सुबह के कारोबार में जापान के बाहर के एशिया-प्रशांत शेयरों का एमएससीआई (MSCI) का सबसे व्यापक सूचकांक 1% से अधिक बढ़ गया। जापान के निक्केई सूचकांक में भी 2% की तेजी देखी गई, लेकिन यह सप्ताह के कुल प्रदर्शन के लिहाज से अभी भी 3% की गिरावट की ओर बढ़ रहा है। यह उतार-चढ़ाव दर्शाता है कि बाजार अभी भी पिछले झटकों से उबरने की कोशिश कर रहा है और किसी भी नकारात्मक खबर से फिर से गिरावट की स्थिति बन सकती है। बाजार में इस अस्थिरता का मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर बनी अस्पष्टता है। हाल के आर्थिक आंकड़ों ने संकेत दिया है कि अमेरिका में मुद्रास्फीति अभी भी नियंत्रण के दायरे से बाहर हो सकती है, जिससे फेड द्वारा ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक ब्याज दरों का सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) और भारतीय रुपये (INR) की विनिमय दर पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाजार (ASX 200) भी एशियाई रुझानों के अनुरूप प्रतिक्रिया दे रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के निवेशकों, विशेष रूप से वे जो सुपरएन्युएशन (Superannuation) और प्रत्यक्ष शेयर निवेश में सक्रिय हैं, के लिए यह समय सतर्क रहने का है। जानकारों का मानना है कि जब तक फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलता, तब तक बाजार में ऐसी ही 'चॉपी' यानी अस्थिर स्थिति बनी रहेगी। भारतीय बाजारों के संदर्भ में भी, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां एशियाई बाजारों के इस अनिश्चित रुख से प्रभावित हो रही हैं। सिडनी और मेलबर्न में स्थित वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में पोर्टफोलियो विविधीकरण (Diversification) ही जोखिम कम करने का एकमात्र उपाय है। आने वाले सप्ताह में वैश्विक मुद्रास्फीति के आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की टिप्पणियों पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय करेंगे।
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