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भोज वेटलैंड में अतिक्रमण विरोधी अभियान फिर शुरू, 65 दिनों के अंतराल के बाद प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 07:31 am
भोज वेटलैंड में अतिक्रमण विरोधी अभियान फिर शुरू, 65 दिनों के अंतराल के बाद प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

भोपाल नगर निगम और जिला प्रशासन ने भोज वेटलैंड के पास अवैध निर्माणों को ढहाने का काम फिर से शुरू कर दिया है। उच्च न्यायालय के स्थगन आदेशों के कारण यह प्रक्रिया दो महीने से रुकी हुई थी।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रशासन ने प्रतिष्ठित भोज वेटलैंड (बड़ा तालाब) के जलग्रहण क्षेत्र में अवैध अतिक्रमणों को हटाने का अभियान फिर से शुरू कर दिया है। लगभग 65 दिनों के लंबे अंतराल के बाद शुरू हुई इस कार्रवाई ने शहर के भू-माफियाओं और अवैध निर्माणकर्ताओं के बीच हड़कंप मचा दिया है। यह अभियान पहले कानूनी अड़चनों और उच्च न्यायालय द्वारा जारी स्थगन आदेशों के कारण रोक दिया गया था। राजस्व विभाग और भोपाल नगर निगम (BMC) की संयुक्त टीम ने मंगलवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चिन्हित स्थलों पर बुलडोजर चलाए। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई उन संपत्तियों पर केंद्रित है जो झील के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (FRL) के भीतर आती हैं। टीटी नगर की एसडीएम अर्चना रावत शर्मा ने मीडिया को बताया कि अभियान के इस चरण में उन निर्माणों को लक्षित किया गया है जिनके कानूनी विवाद सुलझ चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में यह कार्रवाई विभिन्न चरणों में जारी रहेगी और किसी भी प्रकार के अवैध दबाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस देरी का मुख्य कारण उच्च न्यायालय द्वारा कुछ संपत्तियों को दिया गया अंतरिम स्टे (स्थगन आदेश) था। नगर निगम के विधि विभाग ने इन आदेशों को रद्द करने के लिए सक्रिय रूप से पैरवी की, जिसके बाद प्रशासन को आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ। भोज वेटलैंड, जो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 'रामसर साइट' है, पिछले कुछ वर्षों से बढ़ते शहरीकरण और अवैध निर्माणों के कारण खतरे में है। झील के संरक्षण के लिए काम करने वाले पर्यावरणविदों ने इस कदम का स्वागत किया है, हालांकि उन्होंने इसे और अधिक व्यापक बनाने की मांग की है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर अपने गृह नगरों में बुनियादी ढांचे और पर्यावरण के संतुलन को करीब से देखते हैं, यह समाचार महत्वपूर्ण है। जिस तरह ऑस्ट्रेलिया में सिडनी या मेलबर्न के आसपास के वेटलैंड्स और जल निकायों के संरक्षण के लिए कड़े कानून लागू हैं, भोपाल में भी इसी तरह की सख्ती की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। प्रवासी भारतीयों के लिए यह देखना उत्साहजनक है कि भारत में अब पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए प्रशासनिक और कानूनी मशीनरी अधिक सक्रिय हो रही है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि वर्तमान अभियान केवल शुरुआत है। उन सभी संरचनाओं की सूची तैयार कर ली गई है जो झील के 'फुल टैंक लेवल' (FTL) के भीतर बनी हैं। आने वाले हफ्तों में, प्रशासन का लक्ष्य इन सभी अवैध ढांचों को हटाकर झील के प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करना है। शहर की जल सुरक्षा और जैव विविधता के लिए भोज वेटलैंड का अस्तित्व अनिवार्य है, और सरकार की यह कार्रवाई इसी दीर्घकालिक लक्ष्य की ओर इशारा करती है।
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5 जुल॰ 2026, 07:05 am
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