राजनीति
बस्ती: उप निबंधन कार्यालय में हड़ताल जारी, रजिस्ट्री और कानूनी कामकाज पूरी तरह ठप
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 08:22 am

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में उप निबंधन कार्यालय के कर्मचारियों और अधिवक्ताओं की हड़ताल से रजिस्ट्री कार्य ठप है, जिससे आम जनता और प्रवासियों को भारी परेशानी हो रही है।
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में प्रशासनिक कामकाज उस समय गहरे संकट में घिर गया जब उप निबंधन कार्यालय (सब-रजिस्ट्रार ऑफिस) में जारी हड़ताल आज भी जारी रही। कर्मचारियों और दस्तावेज लेखकों की इस हड़ताल के कारण जमीन की रजिस्ट्री, विवाह पंजीकरण और अन्य आवश्यक कानूनी दस्तावेजीकरण का काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। कार्यालय के बाहर सन्नाटा पसरा है, जबकि दूर-दराज के इलाकों से आए लोग बिना काम कराए वापस लौटने को मजबूर हैं।
हड़ताल का मुख्य कारण कार्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार, स्टाफ की कमी और हाल ही में लागू की गई कुछ तकनीकी प्रक्रियाओं के प्रति विरोध बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था से न केवल कर्मचारियों पर दबाव बढ़ रहा है, बल्कि आम नागरिकों को भी अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ता है। वकीलों और दस्तावेज लेखकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे।
इस गतिरोध का सबसे गहरा असर उन भारतीय प्रवासियों (NRIs) पर पड़ रहा है जो ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से एक सीमित समय के लिए अपने पैतृक निवास बस्ती आते हैं। आईसीएस24 (ICN24) से बात करते हुए, सिडनी में रहने वाले एक प्रवासी ने बताया कि वह अपनी पुश्तैनी जमीन की रजिस्ट्री के सिलसिले में विशेष रूप से भारत आए थे, लेकिन हड़ताल के कारण उनका पूरा समय और हवाई टिकट के पैसे बर्बाद हो रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के कई लोग अक्सर अपनी छुट्टियों का उपयोग संपत्ति विवादों को सुलझाने या नए निवेश के लिए करते हैं। ऐसी अनिश्चितकालीन हड़तालें उनके लिए बड़ी आर्थिक और मानसिक चुनौती पेश करती हैं।
राजस्व के दृष्टिकोण से भी यह हड़ताल सरकार के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। निबंधन कार्यालय से हर दिन लाखों रुपये का राजस्व स्टांप शुल्क के रूप में सरकारी खजाने में जाता है। काम बंद होने से सरकार को भारी वित्तीय घाटा हो रहा है। स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश की है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है।
आम नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए ताकि जरूरी काम प्रभावित न हों। विशेषकर उन मामलों में जहां समय की पाबंदी अनिवार्य है, जैसे कि बैंक ऋण के लिए संपत्ति के दस्तावेज जमा करना या विदेश जाने वाले छात्रों के लिए शपथ पत्र बनवाना। फिलहाल, सबकी निगाहें प्रशासन और हड़तालियों के बीच होने वाली अगली बैठक पर टिकी हैं, जिससे इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है।
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