राजनीति
बरेली: 40 ईपीएस-95 पेंशनर्स का सम्मान; 7,500 रुपये न्यूनतम पेंशन और चिकित्सा सुविधाओं की उठी पुरजोर मांग
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 01:34 am
बरेली में आयोजित एक विशेष बैठक में 75 वर्ष से अधिक आयु के 40 पेंशनर्स को सम्मानित किया गया, साथ ही सरकार से न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग की गई।
उत्तर प्रदेश के बरेली में ईपीएस-95 पेंशनर्स की एक महत्वपूर्ण मासिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सेवानिवृत्त कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ असंतोष व्यक्त किया गया। पुराने बस स्टैंड स्थित सभास्थल पर आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) के नेतृत्व में 75 वर्ष और उससे अधिक आयु के 40 वरिष्ठ महिला एवं पुरुष पेंशनर्स को भावभीनी विदाई और सम्मान दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंडल अध्यक्ष ए.के. अरोरा ने की, जबकि संचालन महासचिव अशोक कुमार मिश्रा ने किया।
इस गरिमामयी समारोह में परिवहन निगम, रबर फैक्ट्री, चीनी मिल, आईटीआर और सिंचाई विभाग कार्यशाला जैसे विभिन्न औद्योगिक और सरकारी संस्थानों के सेवानिवृत्त कर्मचारी बड़ी संख्या में एकत्र हुए। सम्मानित होने वाले वरिष्ठ सदस्यों को संगठन की ओर से स्मृति चिन्ह और दुपट्टा भेंट किया गया। वक्ताओं ने इस अवसर पर पेंशनर्स की दयनीय आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दशकों तक देश के विकास में योगदान देने वाले कर्मचारी आज अपनी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु पेंशनर्स की चार सूत्रीय मांगें रहीं। राष्ट्रीय संघर्ष समिति ने केंद्र सरकार से मांग की है कि ईपीएस-95 के तहत आने वाले पेंशनभोगियों को कम से कम 7,500 रुपये मासिक पेंशन दी जाए और इसे महंगाई भत्ते (DA) के साथ जोड़ा जाए। वर्तमान में कई पेंशनर्स को बेहद मामूली राशि मिल रही है, जिससे इस महंगाई के दौर में गुजारा करना असंभव है। इसके साथ ही, पेंशनर दंपत्तियों के लिए निःशुल्क चिकित्सा सुविधा और उच्चतम वेतन के आधार पर पेंशन की गणना की मांग को भी प्रमुखता से दोहराया गया।
अशोक कुमार मिश्रा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जो सदस्य इस योजना के दायरे से बाहर हैं, उनके लिए सरकार को कम से कम 5,000 रुपये मासिक वित्तीय सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लंबे समय से केवल आश्वासन दे रही है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो संगठन राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार करेगा।
भारत में चल रहे इस पेंशन आंदोलन का प्रभाव प्रवासी भारतीयों (NRIs) पर भी पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय प्रवासियों के माता-पिता भारत में इन पेंशन योजनाओं पर निर्भर हैं। आईसीएम24 से बातचीत में कुछ प्रवासियों ने बताया कि भारत में बुजुर्गों की सामाजिक सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार न केवल वहां के नागरिकों के लिए, बल्कि विदेशों में रह रहे उनके बच्चों की मानसिक शांति के लिए भी आवश्यक है। बरेली की इस बैठक ने एक बार फिर बुजुर्गों के सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा के संकल्प को दोहराया है।
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