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राम मंदिर चढ़ावे में धांधली: जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकते चंपत राय, प्रवासी भारतीयों ने जताई चिंता

ICN24 Newsroom 14 जुल॰ 2026, 06:31 am
राम मंदिर चढ़ावे में धांधली: जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकते चंपत राय, प्रवासी भारतीयों ने जताई चिंता

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की खबरों से दुनिया भर के श्रद्धालु आहत हैं। प्रबंधन और ट्रस्ट की जवाबदेही को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।

अयोध्या में नवनिर्मित भव्य राम मंदिर न केवल भारत, बल्कि ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया भर में रहने वाले करोड़ों सनातनी धर्मावलंबियों की आस्था का केंद्र है। पिछले कुछ समय से मंदिर के चढ़ावे (दान) में कथित हेराफेरी और चोरी की खबरों ने इन श्रद्धालुओं को गहरा आघात पहुँचाया है। यह चोरी उन वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी और निगरानी के बीच हुई है, जिनकी निष्ठा और ईमानदारी पर कभी किसी को कोई संदेह नहीं था। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य ट्रस्टियों को इन्हीं गुणों के आधार पर इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया था। लेकिन अब जब सुरक्षा और पारदर्शिता में सेंध लगी है, तो सवाल यह उठता है कि क्या केवल 'पुराने भरोसे' के नाम पर जवाबदेही से बचा जा सकता है? ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय ने राम मंदिर निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर 'निधि समर्पण' अभियान में हिस्सा लिया था। मेलबर्न, सिडनी और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले भारतीयों के लिए यह केवल वित्तीय योगदान नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव का प्रतीक था। अब जब मंदिर में चढ़ावे की चोरी की बात सामने आई है, तो यहाँ के प्रवासी समुदायों में भी गहरी चिंता और नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का मानना है कि यदि इतनी कड़ी सुरक्षा और प्रतिष्ठित व्यक्तियों की निगरानी के बावजूद चोरी हो सकती है, तो यह प्रबंधन की एक बड़ी विफलता है। राम मंदिर जैसे पवित्र संस्थान में पारदर्शिता का मानक दुनिया में सबसे ऊँचा होना चाहिए। जब किसी व्यक्ति को किसी ट्रस्ट का हिस्सा बनाया जाता है, तो उसके पीछे की मंशा यही होती है कि वे संस्थान की गरिमा और संपत्ति की रक्षा करेंगे। यदि चोरी हुई है, तो यह स्पष्ट है कि या तो निगरानी तंत्र में कमी थी या फिर प्रशासनिक लापरवाही बरती गई। चंपत राय जैसे अनुभवी नेतृत्व को यह समझना होगा कि भक्तों की आस्था से जुड़े इस धन की सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है। वे इस जिम्मेदारी से यह कहकर पीछे नहीं हट सकते कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी या यह छोटी चूक है। प्रबंधन विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों का तर्क है कि ऐसे मामलों में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। जिस प्रकार से दान पात्रों से हेराफेरी की खबरें आई हैं, वह एक बड़े संगठित तंत्र की ओर इशारा करती हैं। यहाँ जवाबदेही 'ऊपर से नीचे' (Top-down) होनी चाहिए। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को अब एक स्वतंत्र ऑडिट और सुरक्षा समीक्षा की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में भक्तों की गाढ़ी कमाई और उनकी आस्था के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके। अंततः, राम मंदिर का निर्माण सत्य और धर्म की जीत का प्रतीक है। यदि इसके संचालन में अपारदर्शिता या भ्रष्टाचार की गंध आती है, तो यह उस पवित्र संकल्प को धूमिल करता है। चंपत राय और ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को सामने आकर न केवल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, बल्कि इस लापरवाही के लिए नैतिक जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए। जवाबदेही ही वह एकमात्र रास्ता है जिससे दुनिया भर के करोड़ों राम भक्तों का विश्वास बना रह सकता है।
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