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असम में वयस्कों के लिए नए आधार पंजीकरण पर रोक, घुसपैठ रोकने के लिए सरकार का कड़ा कदम
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 03:31 pm

असम कैबिनेट ने अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए नए आधार नामांकन पर रोक लगा दी है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली राज्य कैबिनेट ने अवैध आव्रजन पर नकेल कसने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए नए आधार कार्ड नामांकन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह निर्णय उन जिलों में अवैध प्रवासियों की बढ़ती संख्या और आधार कार्ड के दुरुपयोग की चिंताओं के बीच लिया गया है, जहां जनसंख्या में अचानक और असामान्य वृद्धि देखी गई है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध सभी वर्गों पर लागू नहीं होगा। दिव्यांगजनों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और चाय बागान समुदायों के सदस्यों को इस नए नियम से छूट दी गई है। इसके अतिरिक्त, 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों का आधार पंजीकरण पहले की तरह जारी रहेगा। सरकार का मानना है कि वयस्क श्रेणी में नए आवेदनों की गहन जांच अनिवार्य है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी विदेशी नागरिक भारतीय पहचान पत्र प्राप्त न कर सके।
राज्य सरकार के अनुसार, अब से 18 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति को नया आधार कार्ड बनवाने के लिए अपने जिला कलेक्टर (डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट) से 'अनापत्ति प्रमाण पत्र' (NOC) प्राप्त करना होगा। यह प्रक्रिया विशेष रूप से उन क्षेत्रों में सख्ती से लागू की जाएगी जहां मतदाता सूची और जनसंख्या के आंकड़ों में विसंगतियां पाई गई हैं। मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि कुछ जिलों में आधार कार्ड धारकों की संख्या कुल अनुमानित जनसंख्या से अधिक हो गई है, जो संदिग्ध गतिविधि का संकेत देती है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और नागरिकता से जुड़े मुद्दे लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं। प्रवासी भारतीय, विशेषकर वे जो पूर्वोत्तर राज्यों से संबंध रखते हैं, अक्सर भारत में अपने परिवार के सदस्यों के दस्तावेजीकरण और संपत्ति अधिकारों को लेकर चिंतित रहते हैं। असम सरकार की यह नई नीति आधार को 'नागरिकता के प्रमाण' के बजाय केवल एक पहचान और पते के दस्तावेज के रूप में सीमित करने की दिशा में एक और कदम है।
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि वह जल्द ही एक नया पोर्टल लॉन्च करेगी जहाँ नागरिक अपने दस्तावेज़ सत्यापन के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य पारदर्शी जांच सुनिश्चित करना और सुरक्षा एजेंसियों को अवैध घुसपैठियों की पहचान करने में मदद करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति से वास्तविक नागरिकों को कुछ समय के लिए प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से इसे एक आवश्यक कदम माना जा रहा है।
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