राजनीति
अरुणाचल प्रदेश: APSTS-सचखंड वोल्वो समझौते को रद्द करने की मांग, निविदा नियमों के उल्लंघन का आरोप
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:37 am
अरुणाचल जन कल्याण संगठन (AJS) ने APSTS और सचखंड के बीच हुए वोल्वो बस समझौते को तत्काल रद्द करने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि यह समझौता बिना किसी निविदा प्रक्रिया के किया गया है।
ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और सरकारी अनुबंधों में पारदर्शिता को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अरुणाचल जन कल्याण संगठन (AJS) ने राज्य सरकार से अरुणाचल प्रदेश राज्य परिवहन सेवा (APSTS) और सचखंड के बीच हुए वोल्वो बस संचालन समझौते को तुरंत प्रभाव से रद्द करने की मांग की है। संगठन का दावा है कि इस समझौते में निर्धारित दिशानिर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है।
संगठन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री पेमा खांडू और परिवहन मंत्री ओजिंग तासिंग को एक आधिकारिक प्रतिवेदन सौंपा है। इस प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया है कि 21 फरवरी, 2022 को हस्ताक्षरित यह समझौता किसी भी प्रतिस्पर्धी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया के बिना ही पूरा कर लिया गया था। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में किसी भी निजी भागीदारी के लिए खुली निविदा एक अनिवार्य प्रक्रिया है, ताकि राज्य के राजस्व की रक्षा हो सके और निष्पक्षता बनी रहे।
AJS के अनुसार, बिना निविदा के अनुबंध आवंटित करना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाओं को भी जन्म देता है। संगठन ने तर्क दिया कि यदि इस प्रक्रिया में अन्य कंपनियों को भाग लेने का अवसर दिया जाता, तो शायद राज्य को बेहतर सेवाएं और अधिक प्रतिस्पर्धी दरें प्राप्त हो सकती थीं। एजेएस ने राज्य सरकार से इस पूरे मामले की जांच करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
यह मामला केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे उत्तर-पूर्वी भारतीयों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रवासी समुदाय अक्सर अपने गृह राज्यों में बुनियादी ढांचे के विकास और सुशासन (Good Governance) पर पैनी नजर रखता है। सार्वजनिक परिवहन में वोल्वो जैसी प्रीमियम सेवाओं का संचालन राज्य की प्रगति का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इसमें पारदर्शिता की कमी निवेश के माहौल को प्रभावित कर सकती है।
परिवहन विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस समझौते का उद्देश्य राज्य में लंबी दूरी की यात्रा को सुगम और आरामदायक बनाना था। हालांकि, अब प्रक्रियात्मक खामियों के आरोपों ने इस परियोजना पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि सरकार इन मांगों पर गौर नहीं करती है, तो यह मुद्दा आने वाले समय में एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है। फिलहाल, मुख्यमंत्री कार्यालय या परिवहन मंत्रालय की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
AJS ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने विरोध को आगे बढ़ाएंगे। उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन और संसाधनों का उपयोग पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी दायरे में रहकर किया जाए। राज्य में सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन के दावों के बीच यह मामला सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
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