राजनीति
अफ़ग़ान राजदूत ने मौलाना फज़लुर रहमान से की मुलाकात, पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान संबंधों में सुधार की कवायद
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 03:37 pm

अफ़ग़ान राजदूत सरदार अहमद शकीब ने मौलाना फज़लुर रहमान से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की और उन्हें अफ़ग़ानिस्तान के स्वतंत्रता दिवस समारोह में आमंत्रित किया।
इस्लामाबाद में अफ़ग़ानिस्तान के कार्यवाहक राजदूत सरदार अहमद शकीब ने जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान से उनके आवास पर एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच लगातार बढ़ते तनाव को कम करना और द्विपक्षीय संबंधों को एक नई दिशा देना था। राजदूत शकीब ने इस दौरान मौलाना फजलुर रहमान को अफ़ग़ानिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया।
हाल के महीनों में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच संबंधों में काफी कड़वाहट देखी गई है। विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की सक्रियता और डूरंड लाइन पर होने वाली झड़पों ने दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को प्रभावित किया है। ऐसे में मौलाना फजलुर रहमान जैसे प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक नेता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। मौलाना के अफ़ग़ान तालिबान नेतृत्व के साथ ऐतिहासिक और वैचारिक संबंध रहे हैं, जिसके कारण उन्हें अक्सर दोनों देशों के बीच एक सेतु या मध्यस्थ के रूप में देखा जाता है।
बैठक के दौरान राजदूत शकीब ने इस बात पर ज़ोर दिया कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए काबुल और इस्लामाबाद के बीच बेहतर सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि व्यापार, सुरक्षा और जन-संपर्क को मज़बूत करने से ही दोनों देशों के नागरिकों का भला हो सकता है। अफ़ग़ानिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर मौलाना को दिया गया निमंत्रण केवल एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि अफ़ग़ान सरकार की ओर से पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों के साथ संपर्क साधने की एक सोची-समझी कूटनीतिक पहल मानी जा रही है।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए दक्षिण एशिया की यह अस्थिरता चिंता का विषय रहती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे हज़ारों दक्षिण एशियाई मूल के लोग, जिनमें पाकिस्तानी और अफ़ग़ान मूल के नागरिक भी शामिल हैं, इस क्षेत्र की सुरक्षा पर बारीकी से नज़र रखते हैं। क्षेत्रीय शांति का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के बीच व्यापारिक मार्गों, शिक्षा विनिमय और प्रवासन नीतियों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार होता है, तो इससे पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति बेहतर होगी, जिसका लाभ प्रवासी समुदायों को भी मिलेगा।
मौलाना फजलुर रहमान ने पहले भी कई बार पाकिस्तान सरकार और अफ़ग़ान तालिबान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है। उन्होंने राजदूत को आश्वासन दिया कि वे दोनों पड़ोसी देशों के बीच गलतफहमियों को दूर करने और शांति बहाली के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। हालांकि, यह देखना बाकी है कि इस तरह की कूटनीतिक बैठकों का ज़मीनी स्तर पर क्या असर पड़ता है, खासकर तब जब सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाए हुए हैं।
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