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कर्नाटक के सरकारी स्कूलों की बदलेगी सूरत: ADB ने मंजूर किया 182.89 मिलियन डॉलर का कर्ज, 500 क्लस्टर होंगे स्थापित

ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 05:31 am
कर्नाटक के सरकारी स्कूलों की बदलेगी सूरत: ADB ने मंजूर किया 182.89 मिलियन डॉलर का कर्ज, 500 क्लस्टर होंगे स्थापित

एशियाई विकास बैंक (ADB) ने कर्नाटक में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार के लिए 182.89 मिलियन डॉलर के ऋण को मंजूरी दी है।

मनीला स्थित एशियाई विकास बैंक (ADB) ने कर्नाटक के सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए 182.89 मिलियन डॉलर (लगभग 1,500 करोड़ रुपये) के ऋण को अपनी मंजूरी दे दी है। इस महत्वपूर्ण पहल का उद्देश्य राज्य में 'कर्नाटक पब्लिक स्कूल' (KPS) मॉडल को विकसित करना है, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा मिल सके। इस परियोजना के तहत कर्नाटक में लगभग 500 स्कूल क्लस्टर स्थापित किए जाएंगे। स्कूल क्लस्टर मॉडल का मुख्य उद्देश्य अलग-थलग पड़े छोटे स्कूलों के बजाय एक केंद्रीय बड़े स्कूल के इर्द-गिर्द संसाधनों का वितरण करना है। इससे छात्रों को बेहतर खेल के मैदान, आधुनिक प्रयोगशालाएं और उन्नत डिजिटल शिक्षण सुविधाएं मिल सकेंगी। कर्नाटक, जो भारत का प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र (IT Hub) है, इस निवेश के माध्यम से अपनी भावी पीढ़ी को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने की योजना बना रहा है। ADB के अनुसार, यह वित्तपोषण मुख्य रूप से माध्यमिक शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) और डिजिटल साक्षरता पर केंद्रित होगा। परियोजना में छात्राओं और विकलांग बच्चों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा गया है। स्कूलों में सुरक्षित पेयजल, स्वच्छता सुविधाएं और जलवायु-अनुकूल (Climate-resilient) भवनों का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा, शिक्षकों के कौशल विकास के लिए भी विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि वे आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप छात्रों को शिक्षित कर सकें। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से कर्नाटक मूल के प्रवासियों के लिए यह एक गर्व की खबर है। बेंगलुरु और कर्नाटक के अन्य हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग ऑस्ट्रेलिया के तकनीकी और शैक्षिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं। अपनी जड़ों से जुड़े रहने वाले इन प्रवासियों के लिए राज्य के सार्वजनिक शिक्षा क्षेत्र में ऐसा बड़ा सुधार एक सकारात्मक संकेत है। यह न केवल राज्य की मानव पूंजी में निवेश है, बल्कि यह उन प्रवासियों को भी प्रेरित करता है जो भविष्य में अपने गृह राज्य में सामाजिक कार्यों या निवेश के माध्यम से योगदान देना चाहते हैं। ADB की दक्षिण एशिया के लिए मानव और सामाजिक विकास क्षेत्र की निदेशक जुम्युंग सोन ने कहा कि यह परियोजना समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कर्नाटक सरकार की इस पहल से न केवल ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी, बल्कि छात्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के प्रति रुचि भी बढ़ेगी। आने वाले वर्षों में, ये 500 क्लस्टर मॉडल स्कूल राज्य के अन्य सरकारी स्कूलों के लिए एक मानक स्थापित करेंगे।
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