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ACT विपक्षी नेता मार्क पार्टन ने मैसेज भेजने की बात स्वीकारी: 'मेरा काम बोरिंग है' वाली टिप्पणी पर विवाद

ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 04:37 pm
ACT विपक्षी नेता मार्क पार्टन ने मैसेज भेजने की बात स्वीकारी: 'मेरा काम बोरिंग है' वाली टिप्पणी पर विवाद

ऑस्ट्रेलियाई राजधानी क्षेत्र (ACT) के विपक्षी नेता मार्क पार्टन ने एक सेक्स वर्कर को 'मेरा काम बोरिंग है' वाला मैसेज भेजने की बात स्वीकार कर ली है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

ऑस्ट्रेलियाई राजधानी क्षेत्र (ACT) की राजनीति में उस समय एक नया मोड़ आ गया जब विपक्षी लिबरल पार्टी के नेता मार्क पार्टन ने आखिरकार यह स्वीकार कर लिया कि उन्होंने एक सेक्स वर्कर को 'मेरा काम बोरिंग है' (My job is boring) वाला संदेश भेजा था। गौर करने वाली बात यह है कि इस हफ्ते की शुरुआत में जब पहली बार यह मामला मीडिया में आया था, तब उन्होंने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक सेक्स वर्कर ने पार्टन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पार्टन ने उन्हें व्यक्तिगत संदेश भेजे थे, जिनमें से एक में उन्होंने अपने राजनीतिक कार्य और जिम्मेदारियों के प्रति अपनी अरुचि व्यक्त की थी। शुरुआती दौर में पार्टन ने कड़ाई से कहा था कि उन्होंने ऐसा कोई मैसेज नहीं भेजा है, लेकिन सबूतों और बढ़ती जांच के बीच उन्होंने अपना बयान बदल दिया है। मार्क पार्टन, जो कैनबरा में लिबरल पार्टी का चेहरा हैं, ने अब स्पष्ट किया है कि वह संदेश वास्तव में उन्हीं के द्वारा भेजा गया था। उन्होंने अपनी पिछली 'गलतफहमी' या इनकार के लिए सफाई देने की कोशिश की है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से उनकी साख को गहरा धक्का लगा है। एक सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा अपने काम को 'बोरिंग' बताना न केवल उनके समर्थकों के लिए निराशाजनक है, बल्कि यह उनकी पेशेवर गंभीरता पर भी सवाल उठाता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जो कैनबरा और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है, यह खबर विशेष महत्व रखती है। प्रवासी समुदाय अक्सर ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में ईमानदारी और उच्च नैतिक मानकों की अपेक्षा करता है। मार्क पार्टन भारतीय समुदाय के कई कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं, ऐसे में उनकी विश्वसनीयता पर उठ रहे ये सवाल समुदाय के भीतर चर्चा का विषय बने हुए हैं। स्थानीय स्तर पर राजनीति में रुचि रखने वाले प्रवासी भारतीयों का मानना है कि नेताओं की निजी और पेशेवर सत्यनिष्ठा उनके वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है। इस खुलासे के बाद अब सत्ताधारी लेबर पार्टी और अन्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने पार्टन के इस्तीफे और उनकी जवाबदेही की मांग तेज कर दी है। लिबरल पार्टी के भीतर भी इस बात को लेकर सुगबुगाहट है कि क्या पार्टन का नेतृत्व आगामी चुनावों में पार्टी के लिए बोझ बन सकता है। फिलहाल, पार्टन ने पद छोड़ने के संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन उनके इस 'यू-टर्न' ने उनकी राजनीतिक यात्रा को एक अनिश्चित मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
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