राजनीति
गुजरात सरकार का बड़ा फैसला: पंचायतों में ऑडिट के बाद 'एग्जिट कॉन्फ्रेंस' हुई अनिवार्य, पारदर्शिता पर जोर
ICN24 Newsroom 6 अग॰ 2026, 05:38 pm

गुजरात सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑडिट के बाद 'एग्जिट कॉन्फ्रेंस' को अनिवार्य कर दिया है, जिससे वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
गांधीनगर: गुजरात सरकार ने राज्य की पंचायती राज व्यवस्था में वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली सरकार ने अब राज्य की सभी पंचायतों में ऑडिट प्रक्रिया के समापन के बाद 'एग्जिट कॉन्फ्रेंस' (Exit Conference) आयोजित करना अनिवार्य कर दिया है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य ऑडिट के दौरान सामने आने वाली विसंगतियों को तत्काल दूर करना और स्थानीय प्रशासन के कामकाज में सुधार लाना है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अब तक पंचायतों के ऑडिट के दौरान कई गंभीर वित्तीय अनियमितताएं या तकनीकी खामियां लंबे समय तक लंबित रहती थीं। नई व्यवस्था के तहत, ऑडिट टीम अपनी जांच पूरी करने के बाद संबंधित पंचायत के पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक औपचारिक बैठक करेगी। इस बैठक में ऑडिट के मुख्य निष्कर्षों पर चर्चा की जाएगी, जिससे स्थानीय अधिकारियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और सुधार की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने का अवसर मिलेगा।
यह पहल त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था—ग्राम पंचायत, तालुका पंचायत और जिला पंचायत—तीनों स्तरों पर लागू होगी। गुजरात सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से न केवल सरकारी धन के उपयोग में पारदर्शिता आएगी, बल्कि भविष्य में होने वाली ऑडिट आपत्तियों की संख्या में भी कमी आएगी। सुशासन के इस मॉडल के तहत, ऑडिट रिपोर्ट केवल एक कागजी दस्तावेज न रहकर प्रशासन के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगी।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से गुजरात मूल के प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे कई गुजराती प्रवासी अपने पैतृक गांवों में सामाजिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (जैसे स्कूल, पेयजल योजनाएं और मंदिर) में सक्रिय रूप से दान और निवेश करते हैं। स्थानीय पंचायतों में वित्तीय जवाबदेही बढ़ने से इन प्रवासियों का भरोसा राज्य की विकास प्रक्रियाओं पर और मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सुधारों से विदेशों से आने वाली विकास निधि का सही और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
पंचायत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि एग्जिट कॉन्फ्रेंस की कार्यवाही का लिखित रिकॉर्ड रखा जाएगा और इसे अंतिम ऑडिट रिपोर्ट का हिस्सा बनाया जाएगा। यदि कोई गंभीर विसंगति पाई जाती है, तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही उसी समय तय की जा सकेगी। गुजरात सरकार का यह कदम भारत के अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण पेश कर सकता है, जहां स्थानीय निकायों में वित्तीय प्रबंधन अक्सर एक बड़ी चुनौती बना रहता है।
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