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‘प्रवासी के रूप में मिली स्वीकार्यता ही मेरी सफलता का आधार है’: आरनॉल्ड श्वार्ज़नेगर का प्रेरक संदेश

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 11:38 am
‘प्रवासी के रूप में मिली स्वीकार्यता ही मेरी सफलता का आधार है’: आरनॉल्ड श्वार्ज़नेगर का प्रेरक संदेश

हॉलीवुड सुपरस्टार आरनॉल्ड श्वार्ज़नेगर ने प्रवासियों के प्रति स्वीकार्यता और कृतज्ञता पर एक भावुक संदेश साझा किया है, जो प्रवासी समुदायों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

हॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और कैलिफोर्निया के पूर्व गवर्नर आरनॉल्ड श्वार्ज़नेगर ने हाल ही में अपने जीवन के सफर को याद करते हुए एक ऐसा संदेश साझा किया है, जिसने दुनिया भर के प्रवासी समुदायों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय-प्रवासी समुदाय के दिलों को छू लिया है। श्वार्ज़नेगर ने अपनी सफलता का श्रेय केवल अपनी कड़ी मेहनत को नहीं, बल्कि उस देश की उदारता और स्वीकार्यता को दिया है जिसने उन्हें एक प्रवासी के रूप में अपनाया। अपने बयान में श्वार्ज़नेगर ने कहा, "मैं यहाँ एक प्रवासी के रूप में आया था, और जिस चीज़ ने मुझे अवसर दिए, जिस चीज़ ने मुझे आज यहाँ होने के काबिल बनाया, वह यहाँ के लोगों की खुली बाहें थीं।" उनका यह विचार इस बात पर जोर देता है कि किसी भी नवागंतुक की सफलता में व्यक्तिगत प्रयास के साथ-साथ समाज का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। ऑस्ट्रिया से अमेरिका तक का उनका सफर एक मिसाल है कि कैसे सही अवसर और समावेशी वातावरण एक साधारण प्रवासी को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहचान दिला सकता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए श्वार्ज़नेगर का यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया आज एक सफल बहुसांस्कृतिक समाज है, जहाँ भारतीय प्रवासियों ने न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अपनी गहरी छाप छोड़ी है। श्वार्ज़नेगर की तरह ही, हज़ारों भारतीय ऑस्ट्रेलिया को अपना घर मानते हैं और यहाँ की शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यावसायिक अवसरों के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं। यह संदेश याद दिलाता है कि जब कोई देश प्रवासियों का गर्मजोशी से स्वागत करता है, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बनते हैं बल्कि उस राष्ट्र की प्रगति में भी अपनी पूरी ऊर्जा झोंक देते हैं। श्वार्ज़नेगर ने इस बात को रेखांकित किया कि प्रवासियों का एकीकरण केवल कानूनी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक जुड़ाव और सम्मान से जुड़ा मामला है। उन्होंने बताया कि 'खुली बाहें' और अवसर ही वे बीज हैं जिनसे भविष्य की सफलता की कहानियाँ अंकुरित होती हैं। उनके अनुसार, कृतज्ञता का भाव प्रवासियों को समाज के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाता है। निष्कर्ष के तौर पर, आरनॉल्ड श्वार्ज़नेगर का यह 'क्विट ऑफ द डे' केवल एक फिल्मी सितारे की बात नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों की आवाज़ है जो अपने वतन से दूर एक नई ज़मीन पर अपने सपनों को साकार करने की कोशिश कर रहे हैं। यह समाज के लिए भी एक संदेश है कि समावेशिता और समर्थन ही वह कुंजी है जो अनजान शुरुआत को असाधारण उपलब्धियों में बदल सकती है।
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