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अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से जम्मू-कश्मीर की मानसिकता में आया क्रांतिकारी बदलाव: केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:54 am
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास और स्टार्टअप संस्कृति के प्रति लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है।
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू-कश्मीर के बदलते परिदृश्य पर अपने विचार साझा करते हुए कहा है कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से न केवल संवैधानिक बाधाएं दूर हुई हैं, बल्कि इस क्षेत्र के लोगों की मानसिकता में भी एक गहरा और सकारात्मक बदलाव आया है। एक हालिया कार्यक्रम में बोलते हुए, सिंह ने जोर देकर कहा कि 2019 के फैसले के बाद से केंद्र शासित प्रदेश में अब मुख्यधारा की राजनीति और आर्थिक विकास के प्रति एक नया दृष्टिकोण देखा जा रहा है।
मंत्री ने रेखांकित किया कि पिछले कुछ दशकों से जम्मू-कश्मीर के युवाओं में व्याप्त अनिश्चितता अब महत्वाकांक्षा और नवाचार में बदल गई है। उन्होंने विशेष रूप से 'पर्पल रिवोल्यूशन' (लैवेंडर खेती) और कृषि-तकनीक (Agri-tech) स्टार्टअप्स का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय युवा अब सरकारी नौकरियों के बजाय उद्यमिता की ओर रुख कर रहे हैं। सिंह के अनुसार, यह मानसिकता में आया सबसे बड़ा बदलाव है क्योंकि युवा अब खुद को भारत की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा मानते हैं।
तकनीकी प्रगति और डिजिटल इंडिया पहल का जिक्र करते हुए, डॉ. सिंह ने बताया कि सरकार की नीतियों ने दूरदराज के क्षेत्रों में भी सूचना प्रौद्योगिकी को सुलभ बनाया है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के हटने के बाद, केंद्रीय कानून और कल्याणकारी योजनाएं अब बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध हैं। इससे प्रशासन में पारदर्शिता आई है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है, जिससे आम जनता का तंत्र पर भरोसा बढ़ा है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए जम्मू-कश्मीर की यह प्रगति विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासी, जो जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं या वहां निवेश और पर्यटन में रुचि रखते हैं, इस स्थिरता को एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय भारतीय डायस्पोरा अक्सर कश्मीर में शांति और विकास की चर्चा करता है, क्योंकि वहां की स्थिरता न केवल भारत की सुरक्षा के लिए बल्कि वैश्विक व्यापारिक संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
डॉ. सिंह ने अंत में कहा कि जम्मू-कश्मीर अब अलगाववाद की पुरानी छाया से बाहर निकलकर स्टार्टअप्स, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और आधुनिक कृषि के क्षेत्र में अग्रणी बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरेगा। प्रशासनिक सुधारों और स्थानीय नेतृत्व को सशक्त बनाने के प्रयासों ने एक ऐसा वातावरण तैयार किया है जहां अब केवल विकास की भाषा बोली जाती है।
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